सरकारी कंस्ट्रक्शन कंपनी NBCC (India) के लिए बड़ी राहत की खबर है। मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स (MCA) ने NBCC और उसकी सब्सिडियरी HSCC (India) के विलय के लिए शेयरहोल्डर्स और क्रेडिटर्स की मीटिंग्स को अनिवार्य प्रक्रिया से छूट दे दी है।
क्या है पूरा मामला?
मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स (MCA) ने 9 अक्टूबर, 2026 को जारी अपने आदेश में NBCC (India) और उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी HSCC (India) के मर्जर को हरी झंडी दे दी है। इस फैसले के बाद अब कंपनी को शेयरहोल्डर्स और क्रेडिटर्स की लंबी और जटिल बैठकों की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे मर्जर की प्रक्रिया काफी तेज हो जाएगी।
क्यों मिली छूट?
कंपनी ने कंपनी एक्ट की धारा 230-232 के तहत याचिका दायर की थी। चूँकि HSCC पूरी तरह से NBCC की ही कंपनी है और इस विलय में कोई नए शेयर जारी नहीं किए जा रहे हैं, इसलिए मौजूदा शेयरहोल्डर्स के हितों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। साथ ही, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि 31 मार्च, 2026 तक दोनों कंपनियों पर कोई भी 'सिक्योर्ड क्रेडिटर' नहीं है।
आगे की राह और चुनौतियां
हालाँकि बैठकें नहीं होंगी, लेकिन NBCC को अभी भी उन अनसिक्योर्ड क्रेडिटर्स को नोटिस भेजना होगा जिनका क्लेम ₹1 करोड़ से अधिक है। इसके बाद कंपनी को हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स मिनिस्ट्री, SEBI, स्टॉक एक्सचेंज और RERA जैसे रेगुलेटर्स को सूचित करना होगा।
निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि अगर इन नोटिस पीरियड के दौरान कोई बड़ी आपत्ति आती है, तो अंतिम मंजूरी में देरी हो सकती है। फिलहाल कंपनी अब 'Confirmation Petition' दाखिल करने की तैयारी कर रही है।
