Mukka Proteins ने अपने बायो-वेस्ट प्रोसेसिंग कारोबार के विस्तार की बड़ी योजना पेश की है। कंपनी अपनी म्यूनिसिपल वेट वेस्ट प्रोसेसिंग क्षमता को मौजूदा **200 TPD** से बढ़ाकर दिसंबर **2027** तक **1,000 TPD** तक ले जाने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
भविष्य की तैयारी और नई तकनीक
कंपनी ब्लैक सोल्जर फ्लाई (BSF) बायो-कन्वर्जन तकनीक का उपयोग करेगी। यह तकनीक कार्बनिक कचरे के द्रव्यमान को महज दो सप्ताह के भीतर 80% तक कम कर देती है। इस विस्तार के साथ ही कंपनी अब समुद्री प्रोटीन के पारंपरिक व्यवसाय से निकलकर 'सर्कुलर बायो-इकोनॉमी' में कदम रख रही है।
नई कमाई के रास्ते
इस प्रोजेक्ट से कंपनी चार नए रेवेन्यू स्ट्रीम्स पर काम करेगी:
- एक्वाफीड के लिए हाई-प्रोटीन इंसेक्ट मील
- फीड-ग्रेड इंसेक्ट ऑयल
- इंसेक्ट फ्रैस खाद (Organic Compost)
- बायो-स्टिमुलेंट्स
इसके अलावा, कंपनी लैंडफिल से कचरा हटाकर मीथेन उत्सर्जन को कम करने पर कार्बन क्रेडिट वेरिफिकेशन की भी योजना बना रही है, जो भविष्य में ESG-लिंक्ड कमाई का बड़ा जरिया बन सकता है।
निवेशकों के लिए अहम जानकारी
फिलहाल कंपनी की मरीन प्रोटीन प्रोसेसिंग क्षमता 2,91,720 MTPA है, जिसे बरकरार रखते हुए अब 'बायोरिमेडिएशन यूनिट्स' पर फोकस किया जाएगा। कंपनी ने मार्च 2027 तक 400 TPD का माइलस्टोन रखा है, जिसके बाद दिसंबर 2027 तक इसे 1,000 TPD तक पहुँचाया जाएगा।
रिस्क फैक्टर और निगरानी
इतने बड़े पैमाने पर विस्तार के लिए ऑपरेशनल सटीकता और कचरे की लगातार आपूर्ति (Feedstock sourcing) सबसे बड़ी चुनौती होगी। साथ ही, भारतीय बाजार में इंसेक्ट-बेस्ड प्रोटीन उत्पादों की मांग कितनी तेजी से बढ़ती है, यह देखना निवेशकों के लिए लॉन्ग-टर्म में जरूरी होगा।
