Mukat Pipes ने FY26 में मुनाफे के साथ वापसी की है और **₹5.34 लाख** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जबकि पिछले फाइनेंशियल ईयर में कंपनी को **₹16.03 लाख** का नुकसान हुआ था। हालांकि, बैंक से फाइनेंस न मिलने के कारण कंपनी अब वर्किंग कैपिटल की कमी से जूझ रही है और उसने अपनी फैक्ट्री, जमीन और मशीनरी बेचने के लिए शेयरधारकों से मंजूरी मांगी है।
मुनाफे के पीछे का सच
कंपनी के प्रदर्शन में सुधार का मुख्य श्रेय 'जॉब-वर्क' कॉन्ट्रैक्ट्स को जाता है। FY26 में कुल प्रोडक्शन बढ़कर 4,862.643 MT रहा, जिसमें से 94.31% हिस्सा केवल जॉब-वर्क ऑर्डर्स का था। कंपनी ने आने वाले 18 महीनों के लिए 15,000 MT का नया जॉब-वर्क ऑर्डर भी हासिल किया है, जो पिछले साल के 1,658.325 MT के मुकाबले काफी ज्यादा है।
क्यों बेची जा रही है संपत्ति?
भले ही कंपनी प्रॉफिट में आ गई हो, लेकिन फाइनेंशियल हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। कंपनी का मैनेजमेंट इस बात को खुलकर मान रहा है कि उन्हें बैंकों से पर्याप्त वर्किंग कैपिटल नहीं मिल पा रही है। 28 सितंबर, 2026 को होने वाली 39वीं AGM में एक स्पेशल रेजोल्यूशन रखा जाएगा, जिसमें कंपनी के कोर एसेट्स (जमीन और प्लांट मशीनरी) को बेचने या लीज पर देने की अनुमति मांगी जाएगी ताकि ऑपरेशंस को चालू रखा जा सके।
गवर्नेंस और ऑडिट पर सवाल
कंपनी के ऑडिटर्स ने कुछ गंभीर मुद्दे उठाए हैं। स्टैच्यूटरी ऑडिटर्स के अनुसार, इनकम टैक्स, सेंट्रल एक्साइज और सर्विस टैक्स के तहत ₹79.33 लाख की देनदारियां अभी भी अनपेड हैं। इसके अलावा, ₹11.41 लाख के अनपेड डिविडेंड को 'Investor Education and Protection Fund' (IEPF) में ट्रांसफर करने में भी देरी हुई है। कंपनी फिलहाल गुजरात सिविल कोर्ट में M/s. Modern Construction Co. द्वारा दायर एक कानूनी मामले का भी सामना कर रही है।
आगे क्या देखें? निवेशकों की नजर अब 28 सितंबर की मीटिंग के नतीजों पर होनी चाहिए। एसेट सेल का प्रस्ताव पास होता है या नहीं, यह कंपनी के भविष्य और ऑपरेशनल वायबिलिटी के लिए बेहद अहम होगा।
