MIDHANI ने Heavy Water Board और BARC के साथ एक त्रि-पक्षीय (tripartite) समझौता किया है। इसका मुख्य उद्देश्य 'प्लांट रिवर्ट्स' (plant reverts) से निकल और कोबाल्ट को रिकवर करने की तकनीक विकसित करना है।
महत्वपूर्ण साझेदारी
रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करने वाली कंपनी MIDHANI (मिश्र धातु निगम) ने परमाणु ऊर्जा विभाग के दो प्रमुख संस्थानों—Heavy Water Board (HWB) और Bhabha Atomic Research Centre (BARC) के साथ एक एमओयू (MoU) साइन किया है। यह समझौता औद्योगिक कचरे, जिसे 'प्लांट रिवर्ट्स' कहा जाता है, उससे कीमती धातुओं को निकालने की दिशा में एक बड़ी पहल है।
क्यों है यह खबर खास?
निकल और कोबाल्ट आधुनिक उद्योगों की रीढ़ हैं। इनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बैटरी, सुपरलॉय और हाई-परफॉरमेंस स्टील बनाने में बड़े पैमाने पर होता है। भारत अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए 'सर्कुलर इकोनॉमी' मॉडल की ओर बढ़ रहा है, जहाँ वेस्ट से ही कच्चा माल तैयार किया जा सके। इससे भविष्य में कंपनी की लागत में कमी आने की संभावना है।
मैनेजमेंट की राय
MIDHANI के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. एस वी एस नारायण मूर्ति ने इसे कंपनी के आरएंडडी (R&D) प्रयासों के लिए एक मील का पत्थर बताया है। उनका मानना है कि यह साझेदारी कमर्शियल स्तर पर टिकाऊ समाधान तैयार करने में मदद करेगी।
निवेशकों के लिए नजरिया
यह एमओयू एक रणनीतिक कदम है, न कि कोई तत्काल रेवेन्यू देने वाली खबर। निवेशकों को सलाह है कि वे कंपनी की भविष्य की घोषणाओं पर नज़र रखें, खासकर जब इसके पायलट प्रोजेक्ट्स और कमर्शियल व्यवहार्यता (commercial feasibility) की रिपोर्ट सामने आएगी।
