Milestone Furniture एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। कंपनी ने अपनी कैपिटल बढ़ाने और कर्ज को इक्विटी में बदलने का प्रस्ताव रखा है, लेकिन ऑडिटर की ओर से जारी 'डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन' ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
भारी वित्तीय संकट में कंपनी
FY26 के दौरान कंपनी का रेवेन्यू ₹0.00 रहा है, जबकि कंपनी का नेट लॉस बढ़कर ₹16.98 करोड़ तक पहुंच गया है। कंपनी 21 नवंबर, 2026 को होने वाली अपनी AGM में कैपिटल को ₹10 करोड़ से बढ़ाकर ₹50 करोड़ करने का प्रस्ताव रखेगी। इसके साथ ही, बकाया कर्ज को चुकाने के लिए 86.39 लाख इक्विटी शेयर ₹28.42 प्रति शेयर के भाव पर जारी किए जाएंगे। साथ ही 70 लाख ऑप्शंस वाली नई ESOP स्कीम भी पेश की जा रही है।
ऑडिटर की कड़ी चेतावनी
ऑडिटर M/s Gupta Rajesh & Associates ने अपनी रिपोर्ट में 'डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन' दिया है, जो बेहद गंभीर है। ऑडिटर ने करीब ₹50 करोड़ की ऐसी देनदारियों का जिक्र किया है जो पहले रिकॉर्ड नहीं की गई थीं। इसके अलावा, कंपनी एक्ट की धारा 185 के उल्लंघन और फिक्स्ड एसेट रजिस्टर न होने जैसे गंभीर सवाल भी उठाए गए हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम
कंपनी का अस्तित्व (Going concern status) फिलहाल बड़े खतरे में है। रेवेन्यू न होने और नेट वर्थ से ज्यादा कर्ज होने के कारण कंपनी पूरी तरह से इस रीस्ट्रक्चरिंग पर निर्भर है। आने वाले समय में मैनेजमेंट कैसे इन अनरिकॉर्डेड देनदारियों को सुलझाता है और क्या कंपनी अपना कामकाज फिर से शुरू कर पाएगी, यह देखना सबसे महत्वपूर्ण होगा।
