Midwest Ltd के नतीजे: ₹645 करोड़ का रेवेन्यू, पर लॉजिस्टिक्स ने बिगाड़ा खेल
Midwest Limited ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹645 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पेश किया है। यह पिछले फाइनेंशियल ईयर FY25 के ₹626 करोड़ की तुलना में मामूली बढ़ोतरी है।
चौथी तिमाही में लॉजिस्टिक्स की मार
कंपनी को चौथी तिमाही (Q4 FY26) में अपने ग्रेनाइट सेगमेंट में थोड़ी गिरावट का सामना करना पड़ा। ग्रेनाइट का स्टैंडअलोन रेवेन्यू पिछले साल की इसी तिमाही के ₹226 करोड़ से घटकर ₹214 करोड़ रह गया। कंपनी ने बताया कि लॉजिस्टिक्स और शिपिंग की दिक्कतों के कारण करीब 3,000-4,000 क्यूबिक मीटर का माल नहीं भेजा जा सका, जिससे रेवेन्यू में लगभग ₹25 करोड़ का नुकसान हुआ।
मुनाफे की बात करें तो, कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) मार्जिन 16.49% रहा। वहीं, ग्रेनाइट सेगमेंट का स्टैंडअलोन PAT मार्जिन 17.47% पर मजबूत बना हुआ है। नए क्वार्ट्ज सेगमेंट में शुरुआती फिक्स्ड कॉस्ट और टेक्निकल स्टेबिलाइजेशन की वजह से करीब ₹6 करोड़ खर्च हुए, जिसका असर कंसोलिडेटेड प्रॉफिटेबिलिटी पर पड़ा।
भविष्य की ग्रोथ की कहानी
इन छोटी-मोटी दिक्कतों के बावजूद, Midwest Limited के मैनेजमेंट का फोकस भविष्य की ग्रोथ पर है। कंपनी का लक्ष्य अगले 3-4 सालों में अपने टॉप-लाइन रेवेन्यू को 2.5 गुना बढ़ाना है। इसके लिए कंपनी ग्रेनाइट के अलावा क्वार्ट्ज और दुर्लभ पृथ्वी (Rare Earths) जैसे हाई-ग्रोथ वाले मिनरल सेगमेंट में विस्तार कर रही है।
कंपनी ने FY26 में अपने कर्ज में ₹50 करोड़ की कमी की है और वर्किंग कैपिटल साइकिल को 122 दिनों से घटाकर 104 दिन कर लिया है।
नए सेगमेंट में क्या है खास?
- क्वार्ट्ज: कंपनी का क्वार्ट्ज बिजनेस अब फुल प्रोडक्शन में आ गया है। कंपनी फेज 2 एक्सपेंशन की भी प्लानिंग कर रही है, जिसके लिए FY26-FY27 में ₹125-130 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) होगा। उम्मीद है कि क्वार्ट्ज सेगमेंट Q4 FY27 तक प्रोडक्शन शुरू कर देगा।
- दुर्लभ पृथ्वी (Rare Earths): केरल मिनरल्स एंड मेटल्स लिमिटेड के सहयोग से जुलाई 2026 में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू होने वाला है। अगर यह सफल रहा, तो यह रेवेन्यू का एक और बड़ा ज़रिया बन सकता है।
मैनेजमेंट का बड़ा लक्ष्य
मैनेजमेंट का टारगेट है कि ग्रेनाइट से ₹1,000 करोड़, क्वार्ट्ज से करीब ₹400 करोड़, श्रीलंका HMS से लगभग ₹400 करोड़ और दुर्लभ पृथ्वी से करीब ₹200 करोड़ का रेवेन्यू जेनरेट किया जाए।
किन बातों पर रखें नज़र?
कंपनी को लॉजिस्टिक्स पर निर्भरता, श्रीलंका HMS प्रोजेक्ट में देरी की संभावना और क्वार्ट्ज सेगमेंट की शुरुआती लागतों पर नज़र रखनी होगी। इन चुनौतियों के बीच, कंपनी की नई मिनरल वेंचर्स में ग्रोथ की कहानी निवेशकों के लिए दिलचस्प हो सकती है।
