Mercury Ev-Tech का शानदार प्रदर्शन! Q1 FY27 में रेवेन्यू **321%** बढ़ा, नेट प्रॉफिट में उछाल

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Mercury Ev-Tech का शानदार प्रदर्शन! Q1 FY27 में रेवेन्यू **321%** बढ़ा, नेट प्रॉफिट में उछाल

Mercury Ev-Tech ने Q1 FY27 में अकेले (Standalone) रेवेन्यू में **321%** की ज़बरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की है। हालांकि, कंसोलिडेटेड (Consolidated) नेट प्रॉफिट में मामूली गिरावट आई है। कंपनी ने **₹85.07 करोड़** के कन्वर्टिबल वारंट्स को जब्त (forfeit) भी किया है, जिसे कैपिटल रिजर्व (Capital Reserve) में ट्रांसफर कर दिया गया है।

Mercury Ev-Tech Q1 FY27 नतीजे: स्टैंडअलोन ग्रोथ दमदार, वारंट्स की ज़ब्ती

स्टैंडअलोन रेवेन्यू: ₹20.67 करोड़
कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट: ₹1.56 करोड़

क्या हुआ?

Mercury Ev-Tech Ltd ने 30 जून, 2026 को समाप्त तिमाही (Q1 FY27) के लिए अपने वित्तीय नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी ने स्टैंडअलोन रेवेन्यू में शानदार बढ़ोतरी दर्ज की है, जो पिछले साल की समान तिमाही के ₹4.91 करोड़ से बढ़कर इस साल ₹20.67 करोड़ हो गया है। यह 321% से ज़्यादा की उछाल है। स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट भी ₹0.36 करोड़ से बढ़कर ₹1.44 करोड़ हो गया है।

एक अहम कॉर्पोरेट एक्शन में, कंपनी ने 4.53 करोड़ कन्वर्टिबल वारंट्स को जब्त कर लिया है। ये वारंट्स पहले ₹75 प्रति वारंट की दर से प्रेफरेंशियल बेसिस पर जारी किए गए थे। भुगतान की शेष राशि न आने और निर्धारित 18 महीने की अवधि में इन्हें इस्तेमाल न करने के कारण इन्हें जब्त किया गया। इसके चलते, इश्यू प्राइस के हिस्से के तौर पर पहले से कलेक्ट किए गए ₹85.07 करोड़ को कंपनी के कैपिटल रिजर्व (Capital Reserve) में ट्रांसफर कर दिया गया है। कंपनी का कहना है कि इस ज़ब्ती का तिमाही मुनाफे पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

यह क्यों मायने रखता है?

स्टैंडअलोन प्रदर्शन में यह ज़बरदस्त उछाल Mercury Ev-Tech के ऑपरेशनल परफॉरमेंस में बढ़ती रफ्तार का संकेत देता है। कैपिटल रिजर्व में बड़ी रकम का ट्रांसफर, एक नॉन-ऑपरेशनल कैपिटल इवेंट के ज़रिए कंपनी की बैलेंस शीट को मजबूत करता है। हालांकि, निवेशकों को कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में आई मामूली गिरावट और सब्सिडियरीज़ (Subsidiaries) से मिली अन-ऑडिटेड (Unaudited) वित्तीय जानकारी पर ध्यान देना चाहिए।

पूरी कहानी

मई 2026 में, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने इन वारंट्स को जब्त करने की मंजूरी दी थी। ये वारंट्स प्रेफरेंशियल बेसिस पर जारी किए गए थे। वारंट होल्डर्स द्वारा बाकी भुगतान न कर पाना ही ज़ब्ती और उसके बाद रिजर्व में फंड ट्रांसफर का कारण बना।

अब क्या बदलेगा?

वारंट्स की ज़ब्ती और कैपिटल रिजर्व में ट्रांसफर से कंपनी के रिजर्व स्ट्रक्चर में बदलाव आया है। स्टैंडअलोन रेवेन्यू और प्रॉफिट ग्रोथ में तेज़ी यह संकेत देती है कि अगर ये ट्रेंड जारी रहा तो भविष्य में प्रदर्शन बेहतर हो सकता है। पिछली फर्म के इस्तीफे के बाद नए सेक्रेटेरियल ऑडिटर (Secretarial Auditor) की नियुक्ति भी हुई है।

जोखिम जिन पर नज़र रखें

कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पिछले साल की Q1 FY26 के ₹1.63 करोड़ से घटकर Q1 FY27 में ₹1.56 करोड़ हो गया है। कंपनी के कंसोलिडेटेड नतीजों में चार सब्सिडियरीज़ का अन-ऑडिटेड इंटरिम वित्तीय डेटा शामिल है, जिसकी ऑडिटर द्वारा समीक्षा नहीं की गई है। सब्सिडियरी डेटा की ऑडिट न होने के कारण कंसोलिडेटेड आंकड़ों की सटीकता पर जोखिम हो सकता है।

आगे क्या देखना है?

निवेशक कंपनी की स्टैंडअलोन ग्रोथ की रफ्तार पर नज़र रखेंगे, साथ ही कंसोलिडेटेड प्रॉफिट में गिरावट के कारणों और सब्सिडियरी ऑडिट्स से जुड़े किसी भी नए डेवलपमेंट पर भी ध्यान देंगे। कंपनी की स्टैंडअलोन ग्रोथ को कंसोलिडेटेड स्टेटमेंट में लगातार मुनाफे में बदलने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.