Marble City India ने FY26 में **₹4.30 करोड़** का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल **₹2.38 करोड़** था। Mega Surfaces के अधिग्रहण से मिली इस चमक के बावजूद, कंपनी एनुअल रिपोर्ट में CFO की कमी और इंटरनल ऑडिट रिपोर्ट्स गायब होने जैसी गंभीर गवर्नेंस खामियां सामने आई हैं।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस की स्थिति
कंपनी ने FY26 के लिए अपने फाइनेंशियल आंकड़े जारी कर दिए हैं। कंपनी का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹4.30 करोड़ हो गया है। वहीं, मेगा सरफेसेस एंड लाइफस्टाइल प्राइवेट लिमिटेड में 76% हिस्सेदारी खरीदने के बाद, कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹97.21 करोड़ और कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट ₹7.13 करोड़ दर्ज किया गया है। कंपनी आगामी 30 सितंबर, 2026 को अपनी 33वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) आयोजित करने जा रही है।
गवर्नेंस और कंप्लायंस पर सवाल
ऑपरेशनल ग्रोथ के बीच, सेक्रेटेरियल ऑडिट रिपोर्ट ने कंपनी की इंटरनल गवर्नेंस पर कई सवाल खड़े किए हैं। कंपनी ने साल के एक बड़े हिस्से के दौरान चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) की नियुक्ति नहीं की और इंटरनल ऑडिटर की भी कमी रही है। देरी से रेगुलेटरी फाइलिंग के कारण कंपनी पर पहले ही जुर्माना लगाया जा चुका है, जो एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम की कमजोरी को दर्शाता है।
मैनेजमेंट की सैलरी में बढ़ोतरी का प्रस्ताव
गवर्नेंस लैप्स के बावजूद, कंपनी के बोर्ड ने 1 अप्रैल, 2027 से मैनेजरियल सैलरी की लिमिट को बढ़ाकर ₹1.68 करोड़ सालाना करने का प्रस्ताव रखा है। मैनेजमेंट का तर्क है कि कामकाज का विस्तार होने की वजह से मार्केट स्टैंडर्ड्स के हिसाब से सैलरी बढ़ाना जरूरी है।
निवेशकों के लिए रिस्क फैक्टर्स
निवेशकों को अभी कंपनी के पेंडिंग रेगुलेटरी फॉर्म्स जैसे CRA-4 की फाइलिंग और CFO की नियुक्ति जैसे मामलों पर नजर रखने की जरूरत है। SEBI (LODR) नियमों का पालन न करने के कारण भविष्य में और अधिक पेनल्टी लग सकती है, जो शेयर के लिए एक नेगेटिव संकेत हो सकता है।
