Mangal Electricals के IPO से जुटाए गए **₹400 करोड़** में से **₹85 करोड़** अभी भी इस्तेमाल नहीं हुए हैं। ये रकम फिक्स्ड डिपॉजिट में रखी गई है। वहीं, यूनिट IV के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) में काफी देरी हो रही है, जिससे कंपनी के प्रोजेक्ट टाइमलाइन और फायदों पर सवाल उठ रहे हैं।
IPO फंड का क्या हो रहा है?
Mangal Electricals ने अपने IPO से कुल ₹400 करोड़ जुटाए थे। इनमें से ₹315 करोड़ का इस्तेमाल हो चुका है, जबकि ₹85 करोड़ अभी भी कंपनी के पास पड़े हैं। इस बची हुई रकम को HDFC बैंक में 2026 तक मैच्योर होने वाली फिक्स्ड डिपॉजिट में रखा गया है, जिस पर 5.00% से लेकर 6.15% तक का ब्याज मिल रहा है।
देरी पर चिंता
CARE रेटिंग्स लिमिटेड की एक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के IPO फंड के इस्तेमाल की समीक्षा की गई। इसमें पाया गया कि यूनिट IV के कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) में खासी देरी हुई है। कंपनी ने इसके लिए ₹87.86 करोड़ का प्लान बनाया था, लेकिन अब तक केवल ₹4.76 करोड़ ही खर्च हुए हैं।
क्यों अहम है यह मामला?
यूनिट IV के Capex में हो रही देरी प्रोजेक्ट के लागू होने की समय-सीमा और उससे होने वाले फायदों को प्रभावित कर सकती है। रेटिंग एजेंसी ने फंड के घालमेल (commingling) के कुछ मामले भी उठाए हैं, हालांकि कंपनी का कहना है कि ये फंड्स को अस्थायी तौर पर रखने के लिए थे। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि Mangal Electricals का शेयर भाव, IPO प्राइस से काफी नीचे चल रहा है। IPO का इश्यू प्राइस ₹561 था, जबकि शेयर फिलहाल ₹284 के आसपास ट्रेड कर रहा है।
आगे क्या?
कंपनी को यूनिट IV के Capex के लिए कोटेशन फाइनल करने की प्रक्रिया को तेज करने की जरूरत है। बाकी बचे फंड्स फिलहाल फिक्स्ड डिपॉजिट में हैं, जिससे कुछ रिटर्न मिल रहा है, लेकिन इनके इस्तेमाल का इंतजार है।
जोखिम
सबसे बड़ा जोखिम यूनिट IV के Capex में लगातार हो रही देरी का है, जो कंपनी की भविष्य की ग्रोथ और ऑपरेशनल एफिशिएंसी को धीमा कर सकता है। फंड्स के घालमेल का मामला, मैनेजमेंट के स्पष्टीकरण के बावजूद, पारदर्शिता के लिहाज से चिंता का विषय बना हुआ है।
