Majestic Auto ने अपनी सहायक कंपनी Emirates Technologies में **80%** हिस्सेदारी **₹196 करोड़** में बेच दी है। इस सौदे के बाद कंपनी पूरी तरह कर्ज-मुक्त हो गई है। साथ ही, कंपनी ने **₹25** प्रति शेयर के अंतिम डिविडेंड का भी ऐलान किया है। हालांकि, CFO अजय कुमार ने इस्तीफा दे दिया है।
क्या हुआ है?
Majestic Auto Limited ने अपनी सब्सिडियरी (सहायक कंपनी) Emirates Technologies Private Limited में अपनी 80% हिस्सेदारी ₹196 करोड़ में बेच दी है। यह कंपनी की रियल एस्टेट पर आधारित बिजनेस से फाइनेंशियल एसेट्स में कैपिटल लगाने की रणनीति का हिस्सा है।
इस डिवेस्टमेंट (हिस्सेदारी बिक्री) और पहले से की गई लैंड एसेट्स की बिक्री के बाद, Majestic Auto अब पूरी तरह डेट-फ्री (कर्ज-मुक्त) हो गई है। कंपनी ने ₹35 प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड के अलावा ₹25 प्रति शेयर के अंतिम डिविडेंड का भी प्रस्ताव दिया है।
यह क्यों मायने रखता है?
कर्ज-मुक्त होना Majestic Auto की फाइनेंशियल पोजीशन को काफी मजबूत करता है, जिससे इंटरेस्ट कॉस्ट कम होगी और कंपनी को अधिक वित्तीय लचीलापन मिलेगा। यह डिवेस्टमेंट बिजनेस स्ट्रैटेजी में एक बड़ा बदलाव दिखाता है, जिसमें कंपनी अब स्टॉक, म्यूचुअल फंड, AIFs और फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स में पैसा लगाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसका लक्ष्य वोलैटिलिटी को कम करना और लॉन्ग-टर्म ग्रोथ हासिल करना है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कंपनी का स्टैंडअलोन प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) ₹143.86 करोड़ रहा, जिसमें एसेट डिवेस्टमेंट से ₹122.80 करोड़ का एक्सेप्शनल आइटम शामिल है। इसी अवधि के लिए कंसॉलिडेटेड PBT ₹125.01 करोड़ दर्ज किया गया।
पिछला घटनाक्रम
Majestic Auto अपने ऑपरेशंस को लगातार रीस्ट्रक्चर कर रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में, कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू ₹20.29 करोड़ और कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू ₹35.39 करोड़ था। 31 मार्च 2026 तक कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹289.98 करोड़ था।
अब क्या बदलेगा?
कंपनी अब अपने डायवर्सिफाइड ट्रेजरी इन्वेस्टमेंट्स को मैनेज करने पर फोकस कर रही है। मैनेजमेंट का अनुमान है कि बिजनेस मॉडल एसेट ओनरशिप से फाइनेंशियल एसेट में शिफ्ट होने के कारण, बाजार की स्थितियों के चलते कुछ तिमाहियों में शॉर्ट-टर्म निगेटिव रिटर्न देखने को मिल सकता है।
जोखिम:
Majestic Auto को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। कंपनी का लगभग 61.60% रेवेन्यू सिर्फ तीन कस्टमर्स से आता है, जो एक निर्भरता का जोखिम पैदा करता है। INR डेप्रिसिएशन (रुपये का अवमूल्यन) भी ट्रेजरी परफॉर्मेंस को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, नोएडा ऑफिस स्पेस में संभावित ओवरसप्लाई भविष्य की रियल एस्टेट योजनाओं को प्रभावित कर सकती है, हालांकि कंपनी इस सेक्टर से बाहर निकल रही है।
मैनेजमेंट, ऑडिटर और कंप्लायंस में बदलाव
चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) अजय कुमार ने 24 जून, 2026 से प्रभावी इस्तीफा दे दिया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में, कंपनी ने रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन के उल्लंघन के लिए SEBI को ₹7 लाख का जुर्माना भरा था। BSE ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इंटीग्रेटेड गवर्नेंस रिपोर्ट फाइल करने में 22-दिन की देरी को भी नोट किया है।
निवेशकों के लिए मुख्य बातें:
कंपनी का कर्ज-मुक्त होना और एसेट डिवेस्टमेंट एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत है। निवेशक विभिन्न फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स में नई कैपिटल एलोकेशन स्ट्रैटेजी की प्रभावशीलता पर नजर रखेंगे। डिविडेंड भुगतान सकारात्मक हैं, लेकिन CFO का इस्तीफा और पिछले रेगुलेटरी मुद्दे सावधानीपूर्वक विचार की मांग करते हैं।
