Mahip Industries ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में शानदार वापसी करते हुए खुद को कर्जमुक्त (Debt-Free) बना लिया है। कंपनी का रेवेन्यू बढ़कर **₹9.10 करोड़** हो गया है, लेकिन इसके बावजूद ऑडिटर्स ने कंपनी के इंटरनल कंट्रोल्स और नियमों के पालन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
फाइनेंशियल टर्नअराउंड: आंकड़ों में दम
Mahip Industries ने लंबे समय बाद दमदार वापसी की है। कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल के महज ₹0.08 करोड़ से उछलकर इस बार ₹2.80 करोड़ पर पहुंच गया है। वहीं, ऑपरेशंस से होने वाला रेवेन्यू ₹6.23 करोड़ से बढ़कर ₹9.10 करोड़ दर्ज किया गया है। कंपनी ने Reliance Commercial Finance के सारे बकाया कर्ज चुकाकर राहत की सांस ली है, जिसके चलते अक्टूबर 2025 में BSE पर इसकी ट्रेडिंग फिर से शुरू हो गई है।
ऑडिटर्स की चिंता: गवर्नेंस में 'क्वालिफाइड ओपिनियन'
वित्तीय सुधारों के बावजूद, कंपनी के सामने कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियां खड़ी हैं। वैधानिक ऑडिटर्स ने अपनी रिपोर्ट में 'क्वालिफाइड ओपिनियन' जारी किया है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि कंपनी के इंटरनल फाइनेंशियल कंट्रोल्स का डेटा ऑडिटर्स को उपलब्ध नहीं कराया गया, जो कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
निवेशकों के लिए चेतावनी (Risks to Watch)
कंपनी ने खुद स्वीकार किया है कि उसने 'कंपनीज एक्ट' की धारा 73 (डिपॉजिट्स) और धारा 185 (रिलेटेड-पार्टी लोंस) के नियमों का उल्लंघन किया है। इसके अलावा, इंटरनल ऑडिट रिपोर्ट का न होना और ट्रेड अकाउंट्स के लिए बैलेंस कन्फर्मेशन की कमी निवेशकों के लिए एक रेड फ्लैग (Red Flag) है।
अगले कुछ समय तक शेयरधारकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि कंपनी इन इंटरनल कमियों को कैसे दूर करती है और रेगुलेटरी नॉन-कंप्लायंस के मामलों को कैसे बंद करती है। फिलहाल, मजबूती के साथ रिस्क फैक्टर का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
