महाराष्ट्र सीमलेस लिमिटेड (Maharashtra Seamless Ltd) के लिए फाइनेंशियल ईयर 26 (FY26) के नतीजे मिले-जुले रहे। कंपनी का रेवेन्यू जहां 11% गिरा है, वहीं नेट प्रॉफिट में भी गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, बोर्ड ने प्रति शेयर ₹10 के डिविडेंड को मंजूरी दे दी है और Demerger की योजना पर भी विचार चल रहा है।
महाराष्ट्र सीमलेस का FY26 प्रदर्शन
महाराष्ट्र सीमलेस लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹4,674.34 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल के ₹5,268.66 करोड़ की तुलना में 11% की गिरावट है। कंपनी का नेट प्रॉफिट भी घटकर ₹701.28 करोड़ रह गया, जबकि पिछले साल यह ₹777.49 करोड़ था। प्रति शेयर आय (EPS) भी ₹52.33 से गिरकर ₹58.02 पर आ गई है।
क्यों आई गिरावट?
वित्तीय प्रदर्शन में आई इस कमी के पीछे तेल और गैस सेक्टर से ऑर्डर में आई सुस्ती, खर्चों में कटौती और चीनी आयातकों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण कीमतों पर दबाव प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। कंपनी अब हाई-वैल्यू वाले प्रोडक्ट्स पर ध्यान केंद्रित कर रही है और उसने अपनी कोल्ड-ड्रॉन पाइप्स फैसिलिटी का प्रोजेक्ट भी पूरा कर लिया है।
कंपनी का बैकग्राउंड
वित्त वर्ष 2024-25 में महाराष्ट्र सीमलेस ने बेहतर रेवेन्यू और प्रॉफिट दर्ज किया था। इस साल के नतीजे उद्योग की व्यापक चुनौतियों को दर्शाते हैं, खासकर तेल और गैस सेक्टर में, और आयातकों के प्रभाव को भी।
आगे क्या?
बोर्ड ने प्रति इक्विटी शेयर ₹10 के डिविडेंड की सिफारिश की है, जिसे शेयरधारकों की मंजूरी से 15 सितंबर, 2026 को होने वाली 38वीं AGM में पास किया जाएगा। एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर, बोर्ड ने 22 मई, 2026 को दो व्यावसायिक इकाइयों को सब्सिडियरी कंपनियों में Demerge करने की मंजूरी दी थी, जिस पर फिलहाल समीक्षा चल रही है।
किन जोखिमों पर रखें नज़र?
चीन से सीमलेस पाइप्स की लगातार डंपिंग और तेल व गैस क्षेत्र में पूंजीगत व्यय की धीमी रिकवरी मुख्य चिंताएं हैं। Demerger की अंतिम संरचना और समय-सीमा को लेकर अनिश्चितता भी एक महत्वपूर्ण पहलू है जिस पर निवेशकों की नजर रहेगी।
