Madhucon Projects: भारी नुकसान और कानूनी मुसीबतें! कंपनी के भविष्य पर खड़े हुए गंभीर सवाल

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Madhucon Projects: भारी नुकसान और कानूनी मुसीबतें! कंपनी के भविष्य पर खड़े हुए गंभीर सवाल

Madhucon Projects की FY 2026 की एनुअल रिपोर्ट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। कंपनी को **₹469.98 करोड़** का बड़ा कंसोलिडेटेड लॉस हुआ है और ऑडिटर्स ने कंपनी की 'गोइंग कंसर्न' स्थिति पर सवाल उठाए हैं।

भारी नुकसान और ऑडिटर्स की चेतावनी

कंपनी की 36वीं एनुअल रिपोर्ट के अनुसार, जहां स्टैंडअलोन लेवल पर कंपनी ने ₹11.12 करोड़ का मामूली मुनाफा कमाया, वहीं कंसोलिडेटेड लेवल पर तस्वीर बेहद डरावनी है। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट लॉस ₹469.98 करोड़ रहा। वहीं, टोटल कंसोलिडेटेड इनकम पिछले साल के ₹1,011.24 करोड़ से घटकर ₹751.45 करोड़ रह गई है।

ऑडिटर्स ने क्यों जताई चिंता?

स्टैच्युटरी ऑडिटर्स ने कंपनी की अकाउंटिंग और इंटरनल कंट्रोल्स पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सबसे बड़ी चिंता 'गोइंग कंसर्न' को लेकर है, यानी ऑडिटर्स का मानना है कि कंपनी अपनी लायबिलिटीज चुकाने में सक्षम नहीं है। इसमें रेवेन्यू रिकग्निशन में खामियां और प्रॉपर्टी के टाइटल डीड्स का गायब होना भी शामिल है।

CBI-ED का शिकंजा और कानूनी संकट

कंपनी के लिए कानूनी मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। इसकी सब्सिडियरी Ranchi Expressways Ltd पर CBI और ED की जांच चल रही है। PMLA कानून के तहत कंपनी और उसके डायरेक्टर्स की संपत्ति को अस्थाई रूप से अटैच किया गया है। इसके अलावा, कई सब्सिडियरीज पहले ही NCLT में इंसॉल्वेंसी (CIRP) की प्रक्रिया से गुजर रही हैं।

कर्ज का जाल

लिक्विडिटी की भारी कमी के कारण कंपनी को कर्ज चुकाने में पसीने छूट रहे हैं। Punjab National Bank जैसे लेंडर्स के लोन पर ब्याज का प्रोविजन भी कंपनी ने बंद कर दिया है, जो इसके गहरे फाइनेंशियल क्राइसिस को दर्शाता है। हालांकि कंपनी ने लेंडर्स के साथ वन टाइम सेटलमेंट (OTS) की कोशिश की है, लेकिन सफलता अब भी दूर है।

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