Madhav Marbles & Granites ने अपनी 37वीं AGM 30 सितंबर, 2026 को बुलाई है। कंपनी का स्टैंडअलोन मुनाफा **₹2.39 करोड़** तक पहुंच गया है, लेकिन ऑडिटर की ओर से सब्सिडियरी कंपनियों में किए गए निवेश पर उठाए गए सवाल निवेशकों के लिए एक बड़ा रिस्क फैक्टर बन गए हैं।
मुनाफे में सुधार और AGM का एजेंडा
कंपनी ने शानदार रिकवरी दिखाते हुए स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट को पिछले साल के ₹0.75 करोड़ से बढ़ाकर ₹2.39 करोड़ कर लिया है। वहीं, कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट ₹0.10 करोड़ रहा है। आगामी 30 सितंबर, 2026 को होने वाली AGM में कंपनी लीडरशिप अपॉइंटमेंट के साथ-साथ बड़े 'Related Party Transactions' पर शेयरहोल्डर्स की मंजूरी लेगी।
रिस्क और गवर्नेंस पर सवाल
सबसे अहम बात यह है कि कंपनी के स्टैट्यूटरी ऑडिटर्स ने फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स पर 'Qualified Opinion' दी है। इसका मतलब है कि ऑडिटर कंपनी के हिसाब-किताब से पूरी तरह सहमत नहीं हैं। चिंता का विषय यह है कि जिन सब्सिडियरी कंपनियों की नेट वर्थ पूरी तरह खत्म (eroded) हो चुकी है, उनमें किए गए निवेश और लोन के लिए कंपनी ने कोई प्रोविजनिंग (provisioning) नहीं की है।
ट्रांजेक्शन की तैयारी
कंपनी ने Madhav Ashok Ventures, Madhav Surfaces (FZC) और Madhav Natural Stone Surfaces जैसी कंपनियों के साथ ₹55 करोड़ तक के ट्रांजेक्शन के लिए मंजूरी मांगी है। इसके अलावा, कंपनी एक्ट की धारा 186 के तहत बोर्ड को ₹200 करोड़ तक के लोन और गारंटी देने की विशेष शक्तियां देने का प्रस्ताव भी एजेंडे में है।
मैनेजमेंट का रुख
मैनेजमेंट का कहना है कि ये वित्तीय चुनौतियां 'साइक्लिकल' (समय के साथ ठीक होने वाली) हैं। हालांकि, ऑडिटर की चेतावनी रिटेल निवेशकों के लिए सतर्क रहने का संकेत है। अब निवेशकों की नजरें AGM के दौरान होने वाली चर्चा और Q&A सेशन पर टिकी हैं, जहां मैनेजमेंट को इन सवालों के ठोस जवाब देने होंगे।
