Madhav Infra Projects Ltd **13 अक्टूबर, 2026** को होने वाली बोर्ड बैठक में प्रेफरेंस शेयरों को इक्विटी में बदलने और प्रमोटर लोन के बदले शेयर जारी करने पर विचार करेगी। कंपनी के इस फैसले से कैपिटल स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव आ सकता है।
क्या है कंपनी का प्लान?
कंपनी अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करने के लिए एक बड़े रिस्ट्रक्चरिंग प्लान पर काम कर रही है। बोर्ड बैठक का मुख्य एजेंडा 1% नॉन-क्युमुलेटिव नॉन-कन्वर्टिबल रिडीमेबल प्रेफरेंस शेयरों को 'कंपलसरी कन्वर्टिबल प्रेफरेंस शेयर्स' (CCPS) में बदलना है, जो भविष्य में इक्विटी शेयरों में तब्दील हो जाएंगे। इसके अलावा, कंपनी प्रमोटरों द्वारा दिए गए असुरक्षित लोन (Unsecured Loans) को चुकाने के लिए उन्हें प्रेफरेंशियल आधार पर इक्विटी शेयर जारी करने की योजना बना रही है।
निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
यह कदम कंपनी के कर्ज को कम करने में मदद करेगा, लेकिन मौजूदा निवेशकों को 'इक्विटी डाइल्यूशन' (Equity Dilution) को लेकर सतर्क रहना चाहिए। नई शेयर जारी होने से मौजूदा शेयरहोल्डर्स की हिस्सेदारी का अनुपात कम हो सकता है।
ट्रेडिंग विंडो और आगे की राह
कंपनी ने 1 अक्टूबर, 2026 से ही प्रमोटर्स और की-मैनेजमेंट पर्सनल के लिए ट्रेडिंग विंडो बंद कर दी है। यह प्रतिबंध 30 सितंबर, 2026 को समाप्त होने वाली तिमाही के अनऑडिटेड रिजल्ट्स जारी होने के 48 घंटे बाद तक लागू रहेगा।
निवेशकों को अब 13 अक्टूबर की मीटिंग के नतीजों का इंतजार है। इसमें शेयर कन्वर्जन रेशियो, नई इक्विटी की मात्रा और प्राइजिंग जैसे अहम सवालों के जवाब मिलेंगे, जिसके बाद इसे शेयरधारकों की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
