Madhav Infra Projects ने FY26 की सालाना रिपोर्ट जारी की है। कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट **₹27.41 करोड़** रहा है, जबकि स्टैंडअलोन रेवेन्यू में गिरावट आई है। कंपनी ने विस्तार के लिए **₹1,000 करोड़** तक कर्ज लेने का प्रस्ताव रखा है और इस बार डिविडेंड नहीं देने का फैसला किया है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर एक नजर
कंपनी के FY26 के आंकड़ों में मिला-जुला असर देखने को मिला है। जहां स्टैंडअलोन इनकम 21.3% घटकर ₹454.70 करोड़ रह गई, वहीं कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में 6% की बढ़त दर्ज की गई है, जो ₹27.41 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है। मैनेजमेंट का पूरा ध्यान फिलहाल सोलर प्रोजेक्ट्स और इंफ्रा पाइपलाइन को मजबूत करने पर है।
AGM में बड़े फैसलों की तैयारी
कंपनी की 33वीं AGM 30 सितंबर, 2026 को होने जा रही है, जिसमें शेयरधारकों की मंजूरी के लिए कई अहम प्रस्ताव रखे जाएंगे:
- कर्ज सीमा: कंपनी बोर्ड ने ₹1,000 करोड़ तक की नई बॉरोइंग लिमिट (Borrowing Limit) तय करने का प्रस्ताव रखा है।
- ट्रांजैक्शन लिमिट: Waa Solar और Rahatgarh Berkhedi Corridor जैसे प्रोजेक्ट्स के लिए बड़े रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन की सीमाएं तय की गई हैं।
- डिविडेंड: कंपनी ने भविष्य की ग्रोथ को देखते हुए कैश सुरक्षित रखने का फैसला लिया है, इसलिए इस साल कोई डिविडेंड नहीं दिया जाएगा।
भविष्य की रणनीति और रिस्क
कंपनी का मुख्य फोकस 73.15 MW वाले PM-KUSUM C सोलर प्रोजेक्ट पर है। हालांकि, स्टैंडअलोन रेवेन्यू में आई 21.3% की गिरावट मुख्य कारोबार में दबाव का संकेत देती है। निवेशकों को कंपनी के नए डेट प्लान और इंटर-कंपनी फंडिंग एक्टिविटीज पर नजर रखने की जरूरत है।
