Madhav Infra Projects Q1 FY27: ₹6.25 करोड़ का मुनाफा, पर ऑडिटर ने जताई टैक्स लायबिलिटी पर चिंता!

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AuthorMehul Desai|Published at:
Madhav Infra Projects Q1 FY27: ₹6.25 करोड़ का मुनाफा, पर ऑडिटर ने जताई टैक्स लायबिलिटी पर चिंता!

Madhav Infra Projects ने Q1 FY27 के लिए ₹6.25 करोड़ का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट दर्ज किया है, जबकि रेवेन्यू ₹88.37 करोड़ रहा। ऑडिटर ने टैक्स देनदारी पर एक महत्वपूर्ण बात नोट की है। कंपनी में एक नए कंपनी सेक्रेटरी की नियुक्ति भी हुई है।

Madhav Infra Projects का Q1 FY27 में ₹6.25 करोड़ का प्रॉफिट

Madhav Infra Projects Ltd. ने पहली तिमाही (30 जून 2026 को समाप्त) के अन-ऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स का ऐलान किया है। कंपनी ने ₹6.25 करोड़ का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) दर्ज किया है, जो ₹88.37 करोड़ के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पर आया है। वहीं, स्टैंडअलोन बेसिस पर, कंपनी ने ₹57.35 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹4.47 करोड़ का PAT कमाया है।

इसके अलावा, कंपनी ने सुश्री ईश्वरी हनुमंतसिंह सिंधा को 30 जुलाई 2026 से प्रभावी कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर के पद पर नियुक्त किया है। बोर्ड ने कंपनी की 33वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) के लिए ड्राफ्ट नोटिस को भी मंजूरी दे दी है।

निवेशकों के लिए क्यों है यह अहम?

ये नतीजे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और पावर जनरेशन सेगमेंट में कंपनी के प्रदर्शन की एक झलक देते हैं। नए कंपनी सेक्रेटरी की नियुक्ति एक सामान्य गवर्नेंस अपडेट है। हालांकि, निवेशकों को सबसे अहम बात ऑडिटर की डेफर्ड टैक्स लायबिलिटी (Deferred Tax Liability) को लेकर की गई टिप्पणी पर ध्यान देना चाहिए।

जानिए बैकस्टोरी

Madhav Infra Projects इंफ्रास्ट्रक्चर और पावर जनरेशन सेक्टर में काम करती है। कंपनी नियमित रूप से अपनी तिमाही वित्तीय प्रदर्शन की जानकारी शेयरधारकों को देती रहती है।

आगे क्या?

निवेशकों के लिए अभी कोई बड़े ऑपरेशनल बदलाव की उम्मीद नहीं है। नए कंपनी सेक्रेटरी की नियुक्ति एक प्रक्रियात्मक कदम है। सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि कंपनी भविष्य में ऑडिटर की डेफर्ड टैक्स लायबिलिटी पर की गई टिप्पणी को कैसे संबोधित करती है।

जोखिमों पर एक नज़र

स्टैच्यूटरी ऑडिटर M/s Shah & Kadam द्वारा उठाया गया मुख्य मुद्दा Ind AS 12 के अनुसार डेफर्ड टैक्स लायबिलिटी का गैर-निर्धारण और गैर-प्रावधान है। यदि इसे सही ढंग से संबोधित नहीं किया गया, तो यह भविष्य के टैक्स प्रोविजन्स और प्रॉफिटेबिलिटी पर असर डाल सकता है।

अगली बड़ी खबर

निवेशकों को कंपनी की भविष्य की वित्तीय रिपोर्टों पर नज़र रखनी चाहिए ताकि पता चल सके कि मैनेजमेंट और ऑडिटर इस डेफर्ड टैक्स लायबिलिटी के मुद्दे को कैसे सुलझाते हैं। इसके साथ ही, स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड दोनों बयानों में रेवेन्यू और प्रॉफिटेबिलिटी की ग्रोथ पर नज़र रखना भी महत्वपूर्ण होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.