सरकारी माइनिंग कंपनी MOIL Ltd को वाइनगंगा डिवीजन, बालाघाट से **₹16.08 करोड़** के वाटर टैक्स का डिमांड नोटिस मिला है। यह नोटिस अप्रैल **2008** से सितंबर **2025** के बीच के बकाया पर है, जिसमें इंटरेस्ट और सर्विस चार्ज भी शामिल हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह डिमांड नोटिस CAG (Comptroller and Auditor General) के एक ऑडिट ऑब्जर्वेशन के बाद जारी किया गया है। वाइनगंगा डिवीजन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने MOIL को कुल ₹16,08,16,712 जमा करने का आदेश दिया है। इस राशि में 24% का भारी-भरकम ब्याज और 1% सर्विस चार्ज भी जुड़ा हुआ है।
कंपनी का क्या है रुख?
कंपनी ने साफ कर दिया है कि इस नोटिस का उनकी माइनिंग या एडमिनिस्ट्रेटिव कामकाज पर कोई तत्काल असर नहीं पड़ेगा। मैनेजमेंट फिलहाल इस नोटिस की कानूनी समीक्षा कर रहा है और उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे इस मांग को चुनौती देने के लिए कानूनी रास्ते (Legal Channels) अपनाएंगे।
निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?
भले ही कंपनी के ऑपरेशंस फिलहाल सामान्य हैं, लेकिन यदि कानूनी लड़ाई में फैसला कंपनी के खिलाफ जाता है, तो MOIL को यह बड़ी राशि का भुगतान करना पड़ सकता है। इसका सीधा असर कंपनी के कैश रिजर्व और आने वाले समय में नेट प्रॉफिट पर पड़ सकता है। फिलहाल निवेशक इस पर नजर बनाए रखें कि कंपनी अपनी अपील कब और कैसे दाखिल करती है।
