Lokesh Machines ने पहली तिमाही में **53%** की गिरावट के साथ **₹1.01 करोड़** का मुनाफा दर्ज किया है। हालांकि, कंपनी पर लगे अमेरिकी OFAC के प्रतिबंध **30 जून 2026** से प्रभावी रूप से हटा दिए गए हैं, जो कि एक बड़ी राहत है।
Lokesh Machines की पहली तिमाही के नतीजे
Lokesh Machines Ltd ने 30 जून 2026 को समाप्त हुई पहली तिमाही (Q1 FY27) के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू ₹55.46 करोड़ रहा, जो पिछले तिमाही (Q4 FY26) के ₹59.36 करोड़ से 6.57% कम है। वहीं, कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹1.01 करोड़ रहा, जो पिछले क्वार्टर के ₹2.15 करोड़ से 53.02% की भारी गिरावट दर्शाता है।
सबसे बड़ी खबर: OFAC प्रतिबंधों से मिली मुक्ति
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण खबर यह है कि Lokesh Machines को अमेरिकी विदेश मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) की प्रतिबंधित सूची से हटा दिया गया है। यह निर्णय 30 जून 2026 से प्रभावी होगा। आपको बता दें कि अक्टूबर 2024 से कंपनी विदेशी मुद्रा लेनदेन (foreign currency transactions) को लेकर प्रतिबंधों का सामना कर रही थी। कंपनी ने पुष्टि की है कि सभी कानूनी कार्यवाही पूरी हो चुकी है और कंपनी की रोकी गई संपत्ति जारी कर दी गई है।
प्रतिबंधों का असर और आगे क्या?
OFAC प्रतिबंधों ने Lokesh Machines के संचालन पर एक महत्वपूर्ण बाधा डाली थी। हालांकि, Q1 FY27 में नतीजों में गिरावट देखी गई, लेकिन इन प्रतिबंधों का हटना कंपनी के भविष्य के संचालन और विकास की संभावनाओं के लिए एक बड़ा सकारात्मक कदम है। अब कंपनी बिना किसी रोक-टोक के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार कर सकेगी, जिससे नए अवसर खुल सकते हैं। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसकी कोई सहायक कंपनी (subsidiary), सहयोगी (associate) या संयुक्त उद्यम (joint venture) नहीं है।
आगे की राह और जोखिम
हालांकि प्रतिबंधों का बादल छंट गया है, लेकिन निवेशक कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में रिकवरी का बेसब्री से इंतजार करेंगे। Q1 FY27 में रेवेन्यू और मुनाफे में आई गिरावट को आने वाली तिमाहियों में ठीक करना होगा, ताकि OFAC प्रतिबंधों के हटने के सकारात्मक प्रभाव को सही साबित किया जा सके।
सेगमेंट प्रदर्शन
मशीनरी डिवीजन ने ₹40.22 करोड़ का रेवेन्यू और ₹5.15 करोड़ का PBIT दर्ज किया। वहीं, कंपोनेंट्स डिवीजन ने ₹15.55 करोड़ का रेवेन्यू और ₹2.15 करोड़ का PBIT दिया।
कॉरपोरेट एक्शन
तिमाही के दौरान, कंपनी ने तरजीही आधार पर 13,00,000 इक्विटी शेयर और 27,77,919 वॉरंट आवंटित किए। इसके बाद, 11 जुलाई 2026 को 5,00,000 वॉरंट को इक्विटी शेयरों में बदला गया। 12 अगस्त 2026 तक, 22,77,919 वॉरंट रूपांतरण के लिए लंबित हैं।
वित्तीय अवलोकन
तिमाही के लिए कुल खर्च ₹54.36 करोड़ रहा। फाइनेंस की लागत ₹4.65 करोड़ थी।
