Lloyds Enterprises, अपनी सब्सिडियरी और एक LLP के ज़रिए, Steel Infra Solutions (SISCOL) की **88.12%** हिस्सेदारी **₹1,073.40 करोड़** में खरीदने जा रही है। इस डील से कंपनी का रेवेन्यू बढ़ेगा और SISCOL के IPO की राह भी खुल सकती है।
Lloyds Enterprises ने Steel Infra Solutions में खरीदी बहुमत हिस्सेदारी
Lloyds Enterprises Limited, अपनी सब्सिडियरी Lloyds Engineering Works Limited (LEWL) और Streamland Estate LLP के साथ मिलकर, Steel Infra Solutions Company Limited (SISCOL) में 88.12% हिस्सेदारी ₹1,073.40 करोड़ में अधिग्रहित करने के लिए तैयार है। इस सौदे के 31 जुलाई, 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।
निवेशकों के लिए खास: इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस का विस्तार, एक मुनाफे वाले अधिग्रहण से,
और SISCOL के संभावित IPO से वैल्यू अनलॉक होने की उम्मीद।
आखिर हुआ क्या?
Lloyds Enterprises, Steel Infra Solutions Company Limited (SISCOL) में बहुमत हिस्सेदारी खरीद रही है। 88.12% हिस्सेदारी के लिए कुल ₹1,073.40 करोड़ का भुगतान किया जाएगा। इस सौदे में Lloyds ग्रुप की कई एंटिटीज शामिल हैं और इसे कैश व शेयर स्वैप के ज़रिए अंजाम दिया जा रहा है।
- Lloyds Enterprises ₹219 करोड़ कैश में 17.98% हिस्सेदारी खरीदेगी।
- LEWL ₹635.40 करोड़ (कैश और शेयर स्वैप) में 52.16% हिस्सेदारी लेगी।
- Streamland Estate LLP ₹219 करोड़ कैश में 17.98% हिस्सेदारी अधिग्रहित करेगी।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
इस अधिग्रहण से Lloyds Enterprises का हैवी स्टील फैब्रिकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर सॉल्यूशंस सेक्टर में दबदबा बढ़ेगा। SISCOL ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में ₹816.87 करोड़ का टर्नओवर और ₹43.42 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था। यह डील ग्रुप के कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू, प्रॉफिटेबिलिटी और नेट वर्थ को तुरंत बढ़ाने वाली है। इतना ही नहीं, LEWL सौदे के पूरा होने के 30 महीनों के अंदर SISCOL के IPO के लिए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल करने की दिशा में काम करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे भविष्य में वैल्यू अनलॉक होने की संभावना है।
डील की कहानी
SISCOL, एनर्जी, इंडस्ट्रियल और इंफ्रास्ट्रक्चर सेगमेंट में काम करती है। इसकी सालाना प्रोडक्शन कैपेसिटी 100,000 MT है और इसके छह मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स हैं, जिसमें हैदराबाद में एक नया प्लांट भी शामिल है। कंपनी के पास विस्तार के लिए 25 एकड़ जमीन भी है। SISCOL ने दिल्ली एयरपोर्ट (टर्मिनल 1) और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम किया है। कंपनी का टर्नओवर लगातार बढ़ा है, जो फाइनेंशियल ईयर 2023-24 के ₹573.49 करोड़ से बढ़कर फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में ₹816.87 करोड़ हो गया।
अब क्या बदलेगा?
इस अधिग्रहण से SISCOL की बड़ी ऑपरेशनल क्षमता और फैसिलिटीज Lloyds ग्रुप में शामिल हो जाएंगी। इससे सिनर्जी (synergies) पैदा होने, वित्तीय मेट्रिक्स में सुधार होने और भविष्य में ग्रोथ के लिए एक मजबूत प्लेटफॉर्म मिलने की उम्मीद है। SISCOL की नियोजित लिस्टिंग स्वतंत्र मूल्यांकन और पूंजी जुटाने का जरिया प्रदान करेगी।
जोखिम जिन पर नज़र रखें
निवेशकों को 31 जुलाई, 2026 की समय सीमा तक अधिग्रहण के समय पर पूरा होने की निगरानी करनी चाहिए। इंटीग्रेशन की चुनौतियाँ और SISCOL के IPO रोडमैप का सफल एग्जीक्यूशन भी महत्वपूर्ण फैक्टर होंगे जिन पर नज़र रखनी होगी।
प्रतिस्पर्धियों से तुलना
हैवी स्टील फैब्रिकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर सॉल्यूशंस सेक्टर में काम करने वाली प्रमुख कंपनियों में Larsen & Toubro, Kalpataru Power Transmission और Skipper Limited शामिल हैं। SISCOL की 100,000 MT की सालाना क्षमता और 25 एकड़ जमीन इसे एक कॉम्पिटिटिव एज प्रदान करती है।
मेट्रिक्स (समय-आधारित)
SISCOL का टर्नओवर ₹573.49 करोड़ (FY 2023-24) से बढ़कर ₹816.87 करोड़ (FY 2025-26) हो गया। अधिग्रहण 31 जुलाई, 2026 तक पूरा होने का लक्ष्य है।
आगे क्या ट्रैक करें?
निवेशकों को अधिग्रहण पूरा होने की प्रगति, इंटीग्रेशन के माइलस्टोन्स और SISCOL के IPO के लिए DRHP फाइलिंग से संबंधित किसी भी घोषणा पर नज़र रखनी चाहिए।
