Lloyds Enterprises ने दूसरी तिमाही (Q2 FY27) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने **₹693.91 करोड़** का रेवेन्यू और **₹58.23 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जिसमें नई सब्सिडियरी SISCOL का बड़ा योगदान है।
मुनाफे में SISCOL का असर
कंपनी के नतीजों में Steel Infra Solutions Company Limited (SISCOL) के शामिल होने के बाद से तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। 17 अगस्त 2026 को SISCOL के अधिग्रहण के बाद, कंपनी का कुल रेवेन्यू पहली छमाही (H1) में बढ़कर ₹1,256.94 करोड़ पर पहुंच गया है। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि मौजूदा आंकड़े पिछले साल की पहली छमाही से सीधे तुलना योग्य नहीं हैं क्योंकि कंपनी का स्ट्रक्चर अब पूरी तरह अलग हो चुका है।
बोर्ड के अहम फैसले
कंपनी के बोर्ड ने उन शेयरहोल्डर्स के 3,35,552 आंशिक रूप से चुकता (partly paid-up) शेयर्स को जब्त (forfeit) करने का निर्णय लिया है, जिन्होंने कॉल मनी का भुगतान नहीं किया था।
SEBI सेटलमेंट और कानूनी पेंच
Lloyds Enterprises ने जुलाई 2025 के नोटिस से जुड़े SEBI प्रोसीडिंग्स को सुलझा लिया है। इस सेटलमेंट के तहत कंपनी ने ₹4.16 करोड़ का भुगतान किया है, जिसे प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट में डेबिट के रूप में दिखाया गया है।
सेगमेंट वाइज प्रदर्शन (H1)
कंपनी के अलग-अलग बिजनेस वर्टिकल्स का प्रदर्शन इस प्रकार रहा:
- इंजीनियरिंग सेगमेंट: ₹1,120.62 करोड़ का रेवेन्यू
- स्टील सेगमेंट: ₹156.85 करोड़ का रेवेन्यू
- रियल एस्टेट: ₹38.55 करोड़ का रेवेन्यू
- इलेक्ट्रिकल सेगमेंट: ₹11.14 करोड़ का घाटा
फिलहाल, कंपनी की 69.57% हिस्सेदारी SISCOL में है। जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में SISCOL के साथ बेहतर तालमेल (integration) और मार्जिन स्टेबिलिटी कंपनी के प्रदर्शन के लिए सबसे अहम फैक्टर्स साबित होंगे।
