Lloyds Enterprises का बड़ा दांव! Steel Infra Solutions में हिस्सेदारी बढ़कर हुई **88%**, **₹1,073 करोड़** का सौदा

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Lloyds Enterprises का बड़ा दांव! Steel Infra Solutions में हिस्सेदारी बढ़कर हुई **88%**, **₹1,073 करोड़** का सौदा

Lloyds Enterprises ने Steel Infra Solutions Company Limited (SISCOL) में अपनी हिस्सेदारी **17.98%** और बढ़ाने का ऐलान किया है। इस सौदे के लिए कंपनी **₹1,073 करोड़** खर्च करेगी, जिसके बाद SISCOL में ग्रुप की कुल हिस्सेदारी करीब **88%** हो जाएगी।

Lloyds Enterprises ने Steel Infra Solutions में क्यों बढ़ाई हिस्सेदारी?

Lloyds Enterprises Limited (LEL) ने Steel Infra Solutions Company Limited (SISCOL) में एक और 17.98% शेयर खरीदने की डील पक्की की है। इस सौदे के बाद, SISCOL में Lloyds Group की कुल हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 88% हो गई है। कंपनी ने इस डील के लिए ₹1,073 करोड़ का भुगतान किया है, जिससे SISCOL का कुल वैल्यूएशन ₹1,220 करोड़ आंका गया है। LEL ने इस सौदे में सीधे ₹219 करोड़ का योगदान दिया है।

इस डील से क्यों पड़ेगा फर्क?

यह कदम Lloyds Enterprises की स्ट्रक्चरल स्टील फैब्रिकेशन इंडस्ट्री में अपनी स्थिति मजबूत करने की रणनीति को दिखाता है। SISCOL में बड़ी हिस्सेदारी का मतलब है कि कंपनी के अहम ऑपरेशनल एसेट पर ज्यादा कंट्रोल होगा, जिससे Lloyds Group के लिए बेहतर तालमेल और मुनाफा कमाने के मौके बढ़ सकते हैं।

SISCOL इस सेक्टर का एक अहम खिलाड़ी है। FY26 के लिए इसके रेवेन्यू का अनुमान लगभग ₹817 करोड़ और EBITDA करीब ₹92 करोड़ रहने की उम्मीद है। वहीं, इसका अनुमानित आफ्टर-टैक्स प्रॉफिट ₹44 करोड़ है। कंपनी के पास लगभग ₹1,134 करोड़ का बड़ा ऑर्डर बुक भी है, जो आने वाले समय में मजबूत कमाई की ओर इशारा करता है।

SISCOL का बैकग्राउंड

SISCOL के भिलाई, वडोदरा और हैदराबाद में कुल छह मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हैं, जिनकी कंबाइंड कैपेसिटी 100,000 MTPA है। यह कंपनी डिजाइन, इंजीनियरिंग, फैब्रिकेशन और इरेक्शन जैसी सेवाएं देती है। 2018 से अब तक SISCOL ने 22 राज्यों में 187 प्रोजेक्ट्स पूरे किए हैं और L&T, Tata Projects और Adani Power जैसे बड़े क्लाइंट्स को अपनी सेवाएं दी हैं।

आगे क्या?

SISCOL एक अलग कंपनी के तौर पर अपने मौजूदा ब्रांड और लीडरशिप के तहत काम करना जारी रखेगी। रवि उपपल चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर बने रहेंगे, जिससे क्लाइंट्स और पार्टनर्स के लिए बिजनेस में कोई रुकावट न आए।

जोखिम क्या हैं?

हालांकि यह अधिग्रहण कंट्रोल को मजबूत करता है, लेकिन इंटीग्रेशन की चुनौतियां और SISCOL की क्षमताओं का Lloyds Group के ढांचे में पूरी तरह से उपयोग करने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी। स्टील फैब्रिकेशन सेक्टर और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन टाइमलाइन को प्रभावित करने वाली मार्केट की स्थितियां भी ध्यान रखने योग्य हैं।

आगे क्या देखना होगा?

निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि Lloyds Enterprises, SISCOL के ऑपरेशंस को कैसे एकीकृत करती है ताकि ग्रोथ बढ़ाई जा सके और मार्जिन सुधारा जा सके। ₹1,134 करोड़ के ऑर्डर बुक के एग्जीक्यूशन पर नज़र रखना अहम होगा।

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