Lloyds Engineering Works लिमिटेड (LEWL) ने SISCOL में **88.12%** हिस्सेदारी खरीदने का ऐलान किया है। इस सौदे की कुल कीमत **₹1,073 करोड़** है। इस अधिग्रहण के ज़रिए कंपनी खुद को एक एकीकृत इंजीनियरिंग, फैब्रिकेशन और ईपीसी (EPC) प्लेटफॉर्म के तौर पर बदलना चाहती है, जिससे उसकी क्षमता और बाजार में पहुंच दोनों बढ़ेगी। इस डील के लिए कंपनी शेयर जारी करके फंड भी जुटाएगी।
Lloyds Engineering ने SISCOL में 88.12% हिस्सेदारी ₹1,073.40 करोड़ में खरीदी
Lloyds Engineering Works लिमिटेड (LEWL) ने SISCOL में 88.12% हिस्सेदारी का अधिग्रहण करने की घोषणा की है, जिसमें 52.16% का कंट्रोलिंग इंटरेस्ट भी शामिल है। इस सौदे की कुल कीमत ₹1,073.40 करोड़ है। इस बड़े कदम के साथ, LEWL की क्षमताएं काफी बढ़ जाएंगी और कंपनी एक एकीकृत इंजीनियरिंग, फैब्रिकेशन और ईपीसी (EPC) प्लेटफॉर्म के रूप में उभरेगी। SISCOL ने फाइनेंशियल ईयर 26 (FY26) में ₹816.87 करोड़ का टर्नओवर और ₹43.42 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था।
क्यों यह डील महत्वपूर्ण है?
यह अधिग्रहण LEWL के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है। कंपनी का लक्ष्य एक स्पेशलाइज्ड मैन्युफैक्चरर से आगे बढ़कर एक व्यापक इंजीनियरिंग, फैब्रिकेशन और ईपीसी सेवा प्रदाता बनना है। इस सौदे के बाद, संयुक्त कंपनी की स्ट्रक्चरल फैब्रिकेशन क्षमता 150,000 MTPA (मेट्रिक टन प्रति वर्ष) से बढ़कर 200,000 MTPA तक पहुंचने की उम्मीद है। यह कदम ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बड़े टर्नकी (Turnkey) और ईपीसी प्रोजेक्ट्स को हासिल करने में कंपनी की स्थिति को मजबूत करेगा। LEWL ने वित्त वर्ष 2029-30 (FY29/FY30) तक ₹10,000 करोड़ से अधिक के रेवेन्यू का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी रखा है।
डील के पीछे की कहानी
SISCOL ने पिछले तीन फाइनेंशियल ईयर में लगातार रेवेन्यू ग्रोथ दिखाई है। FY24 में ₹573.49 करोड़ का टर्नओवर FY26 में बढ़कर ₹816.87 करोड़ हो गया। कंपनी के पास 2018 से 187 स्ट्रक्चरल स्टील प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक पूरा करने का ट्रैक रिकॉर्ड भी है। LEWL अपनी लंबी अवधि की रेवेन्यू ग्रोथ की रणनीति के तहत SISCOL की प्रॉफिटेबिलिटी और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन क्षमताओं का फायदा उठाना चाहती है।
अब आगे क्या बदलेगा?
SISCOL के इंटीग्रेशन से ऑपरेशनल एफिशिएंसी में काफी सुधार होने की उम्मीद है। मैनेजमेंट को कंसॉलिडेटेड प्रोक्योरमेंट, साझा इंजीनियरिंग रिसोर्सेज और ऑप्टिमाइज्ड मैन्युफैक्चरिंग यूटिलाइजेशन से लाभ मिलने की उम्मीद है। कंपनी ने ग्रोथ और रणनीतिक पहलों को सपोर्ट करने के लिए वित्तीय संस्थानों से ₹1,000 करोड़ तक का लोन लेने की मंजूरी भी हासिल कर ली है।
जोखिम और चुनौतियां
इस अधिग्रहण का पूरा होना शेयरधारकों और स्टॉक एक्सचेंज की मंजूरी पर निर्भर करता है। सौदे के पूरा होने की अनुमानित तारीख 31 जुलाई, 2026 है, जिसमें देरी की संभावना हो सकती है। SISCOL के ऑपरेशंस, जिसमें प्रोक्योरमेंट और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट शामिल हैं, का सफल इंटीग्रेशन, अपेक्षित तालमेल (Synergies) और मार्जिन सुधार हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
निवेश पर नजर
निवेशकों को अधिग्रहण और शेयर जारी करने की मंजूरी की प्रगति पर नजर रखनी चाहिए। SISCOL के ऑपरेशंस का सफल इंटीग्रेशन और अपेक्षित तालमेल का एहसास प्रमुख प्रदर्शन संकेतक (KPIs) होंगे जिन पर ध्यान देना ज़रूरी है।
मुख्य बिंदु:
- SISCOL FY26 टर्नओवर: ₹816.87 करोड़
- SISCOL FY26 नेट प्रॉफिट: ₹43.42 करोड़
- अधिग्रहण राशि: ₹1,073.40 करोड़
- अनुमानित समापन तिथि: 31 जुलाई, 2026
