Lloyds Engineering Works लिमिटेड (LEWL) ने Steel Infra Solutions Company Limited (SISCOL) के अधिग्रहण का ऐलान किया है। यह डील **₹1,073 करोड़** में फाइनल हुई है, जिससे कंपनी एक इंटीग्रेटेड EPC प्लेटफॉर्म बनने की ओर कदम बढ़ा रही है।
LEWL का 'EPC' मास्टरस्ट्रोक: Steel Infra Solutions पर ₹1,073 करोड़ खर्च
Lloyds Engineering Works Limited (LEWL) ने भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने Steel Infra Solutions Company Limited (SISCOL) को ₹1,073 करोड़ में खरीदने का फैसला किया है। इस डील में SISCOL का वैल्यूएशन ₹1,220 करोड़ रखा गया है।
अधिग्रहण का मकसद: इंटीग्रेटेड EPC प्लेटफॉर्म
इस अधिग्रहण का मुख्य उद्देश्य LEWL को एक स्पेशलिस्ट इंजीनियरिंग मैन्युफैक्चरर से एक फुल-फ्लेज्ड इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) प्लेटफॉर्म में बदलना है। इसके जरिए कंपनी एयरपोर्ट, डेटा सेंटर और इंडस्ट्रियल फैसिलिटीज जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अपनी भागीदारी बढ़ाना चाहती है।
SISCOL का फाइनेंशियल प्रोफाइल
SISCOL ने फाइनेंशियल ईयर 26 (FY26) में ₹817 करोड़ का रेवेन्यू और ₹44 करोड़ का नेट प्रॉफिट (PAT) दर्ज किया था। कंपनी का EBITDA ₹92 करोड़ रहा और इसके पास ₹1,134 करोड़ का ऑर्डर बुक भी है।
LEWL का ग्रोथ ट्रैक रिकॉर्ड
LEWL ने पिछले कुछ सालों में शानदार ग्रोथ दिखाई है। FY19 में जहां कंपनी का रेवेन्यू करीब ₹80 करोड़ था, वहीं अब यह बढ़कर लगभग ₹3,000 करोड़ हो गया है। कंपनी के पास ₹8,000 करोड़ से ज्यादा का ऑर्डर बुक है। SISCOL के अधिग्रहण से इस ग्रोथ को और गति मिलने की उम्मीद है।
भविष्य की योजनाएं और लक्ष्य
SISCOL के स्ट्रक्चरल स्टील डिजाइन, फैब्रिकेशन और इरेक्शन के अनुभव को LEWL की EPC क्षमताओं के साथ जोड़ने से एक मजबूत 'डिजाइन-टू-डिलीवरी' सॉल्यूशन तैयार होगा। कंपनी का लक्ष्य अपनी स्ट्रक्चरल फैब्रिकेशन कैपेसिटी को 150,000 MTPA से बढ़ाकर 200,000 MTPA करना है। साथ ही, कंपनी का लक्ष्य फाइनेंशियल ईयर 29-30 (FY29/30) तक ₹10,000 करोड़ से अधिक का रेवेन्यू हासिल करना है।
जोखिम जिन पर नजर
इस बड़ी डील में कुछ जोखिम भी शामिल हैं, जैसे SISCOL के ऑपरेशंस का सफल इंटीग्रेशन, आक्रामक विस्तार के दौरान मार्जिन एफिशिएंसी बनाए रखना और महत्वाकांक्षी रेवेन्यू लक्ष्यों को हासिल करना।
आगे क्या देखना होगा
निवेशकों को कंपनी के इंटीग्रेशन की प्रगति, कैपेसिटी एक्सपेंशन के माइलस्टोन और प्रतिस्पर्धी इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में रेवेन्यू ग्रोथ के लक्ष्यों को पूरा करने की क्षमता पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।
