Lloyds Engineering का बड़ा दांव: SISCOL में 88.12% हिस्सेदारी ₹1,073 Cr में खरीदी!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Lloyds Engineering का बड़ा दांव: SISCOL में 88.12% हिस्सेदारी ₹1,073 Cr में खरीदी!

Lloyds Engineering Works (LEWL) ने Steel Infra Solutions (SISCOL) में **88.12%** हिस्सेदारी का अधिग्रहण करने का ऐलान किया है। यह डील **₹1,073.40 करोड़** में हुई है, जिसका मकसद इंजीनियरिंग और फैब्रिकेशन प्लेटफॉर्म को मजबूत करना और **FY29-30** तक **₹10,000 करोड़** से ज्यादा का रेवेन्यू हासिल करना है।

क्या हुआ है?

Lloyds Engineering Works Ltd (LEWL) ने एक बड़ी घोषणा करते हुए बताया है कि उसने Steel Infra Solutions (SISCOL) में 88.12% हिस्सेदारी का अधिग्रहण पूरा कर लिया है। इस पूरे सौदे की कीमत ₹1,073.40 करोड़ है। इस कदम से LEWL अब एक एकीकृत (integrated) इंजीनियरिंग, फैब्रिकेशन और EPC प्लेटफॉर्म के तौर पर उभरेगी।

क्यों है यह अहम?

इस अधिग्रहण के बाद LEWL एक मजबूत EPC प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित होगी। LEWL अपनी मौजूदा ताकत को SISCOL के स्ट्रक्चरल स्टील डिजाइन, फैब्रिकेशन और इरेक्शन के खास अनुभव के साथ जोड़ेगी। इससे कंपनी बड़ी और जटिल इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को संभालने में और सक्षम हो जाएगी। इस तालमेल से कंपनी की स्ट्रक्चरल फैब्रिकेशन क्षमता करीब 1,50,000 MTPA तक पहुंच जाएगी, जिसे बढ़ाकर 2,00,000 MTPA करने की योजना है।

SISCOL का पिछला प्रदर्शन?

SISCOL एक मुनाफे वाली कंपनी रही है। फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के अंत तक, SISCOL ने ₹816.87 करोड़ का रेवेन्यू, ₹92 करोड़ का EBITDA और ₹43.42 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था। कंपनी के पास ₹1,134 करोड़ का ऑर्डर बुक भी है।

आगे क्या बदलेगा?

LEWL का मैनेजमेंट उम्मीद कर रहा है कि SISCOL के इंटीग्रेशन से कंपनी बड़ी, एकीकृत परियोजनाओं के लिए ज्यादा प्रभावी ढंग से बोली लगा सकेगी। कंपनी ने FY29-30 तक ₹10,000 करोड़ से ज्यादा का रेवेन्यू हासिल करने का बड़ा लक्ष्य रखा है। इस अधिग्रहण और पूंजीगत जरूरतों को पूरा करने के लिए, LEWL अपने शेयर्स का प्रीफरेंशियल अलॉटमेंट कर रही है। इसमें SISCOL शेयरधारकों और Prime Securities Limited को ₹71.25 प्रति शेयर की दर से इक्विटी शेयर्स जारी किए जाएंगे। इसके अलावा, कंपनी ने ₹1,000 करोड़ तक की उधारी सीमा को भी मंजूरी दे दी है।

निवेशकों के लिए जोखिम

निवेशकों को ₹1,000 करोड़ की उधारी सीमा से कंपनी के बैलेंस शीट पर पड़ने वाले कर्ज के असर पर नजर रखनी होगी। साथ ही, इस रणनीतिक एकीकरण की सफलता प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी, खासकर प्रोक्योरमेंट, इंजीनियरिंग और डिजाइन संसाधनों को मिलाने में ताकि ऑपरेशनल तालमेल (synergies) हासिल किया जा सके।

क्या देखना होगा?

आगामी 15 जुलाई, 2026 को होने वाली एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) पर नजर रखें, जहां शेयरधारकों से अधिग्रहण और शेयर जारी करने की मंजूरी ली जाएगी। ई-वोटिंग के लिए कट-ऑफ डेट 8 जुलाई, 2026 है। कंपनी सौदे के 30 महीने बाद SISCOL की लिस्टिंग के लिए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) भी फाइल करने का इरादा रखती है।

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