Linde India ने Q2 FY2027 के नतीजों का ऐलान कर दिया है। कंपनी का मुनाफा पिछले साल के **₹169.01 करोड़** से घटकर **₹114.95 करोड़** रह गया है, जबकि लीगल मसलों के कारण कंपनी पर कानूनी अनिश्चितता का साया बरकरार है।
नतीजों पर एक नजर
कंपनी के रेवेन्यू में तो बढ़ोतरी देखी गई है, जो पिछले साल के ₹644.19 करोड़ से बढ़कर ₹723.20 करोड़ पर पहुंच गया है, लेकिन इसका फायदा बॉटम लाइन पर नहीं दिख रहा। नेट प्रॉफिट में आई गिरावट ने निवेशकों को निराश किया है। कंपनी का EPS (Earnings Per Share) ₹13.48 दर्ज किया गया है।
कानूनी पचड़ों में फंसी कंपनी
Linde India के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती उसका रेग्युलेटरी विवाद है। Praxair India Private Limited और Linde South Asia Services Private Limited के साथ ट्रांजेक्शन को लेकर कंपनी कानूनी लड़ाई लड़ रही है। ये मामला अभी सब-जुडिस (sub-judice) है, जिस कारण कंपनी ने अभी तक किसी भी संभावित वित्तीय प्रभाव का अनुमान लगाने से इनकार किया है।
निवेशकों के लिए आगे का रिस्क
बाजार की नजर अब 6 नवंबर, 2026 पर टिकी है, जब सुप्रीम कोर्ट में रिलेटेड-पार्टी ट्रांजेक्शन मामले की सुनवाई होनी है। इसके अलावा, कंपनी ने NSE से प्राप्त वैल्यूएशन रिपोर्ट के आधार पर SEBI की कार्रवाई को रोकने के लिए याचिका दायर की है। इन रेग्युलेटरी अनिश्चितताओं के कारण भविष्य के ऑपरेशन्स पर बड़ा असर पड़ सकता है।
आगे क्या होगा?
आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सबकी निगाहें रहेंगी। जॉइंट वेंचर एग्रीमेंट पर आने वाला कोई भी आदेश कंपनी के भविष्य और वित्तीय स्थिति के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
