Lenskart का बड़ा कदम: सब्सिडियरी होंगी मर्ज, मेटल फ्रेम मैन्युफैक्चरिंग के लिए JV का ऐलान

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Lenskart का बड़ा कदम: सब्सिडियरी होंगी मर्ज, मेटल फ्रेम मैन्युफैक्चरिंग के लिए JV का ऐलान

Lenskart Solutions ने अपनी दो पूरी तरह से मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी, Dealskart Online Services और Lenskart Eyetech को पेरेंट कंपनी में मर्ज करने का फैसला किया है। इसके साथ ही, कंपनी ने मेटल फ्रेम मैन्युफैक्चरिंग के लिए चीन की Mingfeng Glassesworld के साथ एक ज्वाइंट वेंचर (JV) बनाने की भी घोषणा की है।

Lenskart Solutions: बड़ा रीस्ट्रक्चरिंग और मैन्युफैक्चरिंग JV

Lenskart Solutions Limited के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने अपनी पूरी तरह से मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी Dealskart Online Services Private Limited और Lenskart Eyetech Private Limited को पेरेंट कंपनी में मिलाने की योजना को मंजूरी दे दी है। साथ ही, कंपनी ने चीन की Mingfeng Glassesworld Limited (MGL) के साथ मिलकर मेटल स्पेक्टेकल फ्रेम बनाने के लिए एक ज्वाइंट वेंचर (JV) बनाने का भी ऐलान किया है।

क्या हुआ?

Lenskart Solutions, Dealskart Online Services (जिसका टर्नओवर ₹6,247.71 मिलियन है) और Lenskart Eyetech (जिसका टर्नओवर ₹312.39 मिलियन है) को अपने में मर्ज कर रही है। इसके अलावा, Lenskart का MGL के साथ 80% हिस्सेदारी वाला एक नया ज्वाइंट वेंचर, 'Lenskart Metalframes Private Limited', मेटल स्पेक्टेकल फ्रेम बनाएगा।

क्यों है यह अहम?

सब्सिडियरी को मर्ज करने का मकसद ऑपरेशंस को सुव्यवस्थित करना और खर्चों को कम करना है। वहीं, यह JV बैकवर्ड इंटीग्रेशन (Backward Integration) को दर्शाता है, जिससे इंपोर्ट पर निर्भरता कम होगी और मेटल फ्रेम के लिए सप्लाई चेन और मजबूत होगी।

यह सब कैसे हुआ?

Lenskart Solutions भारत की एक जानी-मानी आईवियर (Eyewear) रिटेलर है। कंपनी लगातार अपने प्रोडक्ट्स और मार्केट रीच का विस्तार कर रही है। यह रीस्ट्रक्चरिंग और JV, बिजनेस को कंसॉलिडेट करने और मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक स्ट्रैटेजिक कदम है।

अब क्या बदलेगा?

इस मर्जर को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) से मंजूरी मिलने की आवश्यकता होगी। मंजूरी मिलने के बाद, सब्सिडियरी का बिजनेस Lenskart Solutions में इंटीग्रेट हो जाएगा। JV भारत में मेटल फ्रेम के लिए नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित करेगा।

जोखिम

NCLT से मर्जर की मंजूरी में देरी हो सकती है। JV के तहत नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को स्थापित करने और बढ़ाने में एग्जीक्यूशन रिस्क (Execution Risks) शामिल हैं। साथ ही, टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन के लिए JV पार्टनर पर निर्भरता भी एक फैक्टर है।

वित्तीय आंकड़े (31 मार्च 2026 तक)

  • Lenskart Solutions Limited (ट्रांसफरी): ₹52,478.35 मिलियन
  • Dealskart Online Services Private Limited (ट्रांसफरर): ₹6,247.71 मिलियन
  • Lenskart Eyetech Private Limited (ट्रांसफरर): ₹312.39 मिलियन

ज्वाइंट वेंचर की शुरुआती पूंजी ₹100,000 है, जिसमें Lenskart की 80% और MGL की 20% हिस्सेदारी होगी।

आगे क्या देखना है?

NCLT से मर्जर की मंजूरी की स्थिति पर नजर रखें। 'Lenskart Metalframes Private Limited' JV की प्रगति और प्रोडक्शन पर भी नजर रखनी होगी।

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