Lenskart Solutions: कंपनी में बड़ा फेरबदल! सब्सिडियरी का होगा विलय, नए JV से भारत में बनेंगे मेटल फ्रेम

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AuthorMehul Desai|Published at:
Lenskart Solutions: कंपनी में बड़ा फेरबदल! सब्सिडियरी का होगा विलय, नए JV से भारत में बनेंगे मेटल फ्रेम

Lenskart Solutions अपने ऑपरेशंस को सुव्यवस्थित करने के लिए दो पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी का विलय करने जा रही है। इसके साथ ही, कंपनी ने चीन की Mingfeng Glassesworld के साथ मिलकर भारत में मेटल स्पेक्टेकल फ्रेम बनाने के लिए एक ज्वाइंट वेंचर (JV) भी बनाया है, जिसका मकसद बैकवर्ड इंटीग्रेशन को मजबूत करना है।

Lenskart Solutions में बड़े बदलाव

Lenskart Solutions Ltd. अपनी दो पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी, Dealskart Online Services Private Limited और Lenskart Eyetech Private Limited, को पैरेंट कंपनी में मर्ज करने की तैयारी में है। इसके साथ ही, Lenskart ने चीन की Mingfeng Glassesworld Ltd. के साथ मिलकर 'Lenskart Metalframes Private Limited' नाम से एक नया ज्वाइंट वेंचर (JV) स्थापित करने की घोषणा की है। इस JV का मुख्य उद्देश्य भारत में ही मेटल स्पेक्टेकल फ्रेम का निर्माण करना होगा।

क्या है पूरा मामला?

Lenskart Solutions, Dealskart Online Services और Lenskart Eyetech को अपने में समाहित कर लेगी। कंपनी ने Mingfeng Glassesworld के साथ हुए इस JV का भी ऐलान किया है, जिसमें Lenskart की 80% हिस्सेदारी होगी, जबकि चीनी पार्टनर Mingfeng Glassesworld के पास 20% हिस्सेदारी रहेगी। यह JV, Lenskart Metalframes, भारत में मेटल स्पेक्टेकल फ्रेम के उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करेगा।

इस कदम का क्या महत्व है?

इस मर्जर (Amalgamation) का उद्देश्य Lenskart के कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर को सरल बनाना, कंप्लायंस के बोझ को कम करना और ऑपरेशनल तालमेल (Synergies) हासिल करना है। वहीं, यह ज्वाइंट वेंचर बैकवर्ड इंटीग्रेशन की दिशा में एक बड़ा रणनीतिक कदम है। इससे महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स के लिए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को बढ़ावा मिलेगा, आयात पर निर्भरता कम होगी और लंबी अवधि में लागत में कमी आने की उम्मीद है।

पूरी कहानी

Lenskart Solutions भारत में एक अग्रणी आईवियर रिटेलर है। प्रस्तावित मर्जर एक स्ट्रक्चरल रिफॉर्म है, जबकि JV कंपनी के महत्वपूर्ण प्रोडक्ट कंपोनेंट्स के निर्माण में विस्तार को दर्शाता है। यह कदम 'मेक इन इंडिया' पहल और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

अब क्या बदलेगा?

मर्जर के बाद, Lenskart का स्ट्रक्चर और अधिक एकीकृत हो जाएगा। JV मेटल फ्रेम के लिए एक नई मैन्युफैक्चरिंग वर्टिकल स्थापित करेगा। यह स्कीम 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होगी, जो NCLT (National Company Law Tribunal) और अन्य संबंधित अथॉरिटीज से आवश्यक नियामक मंजूरी मिलने पर निर्भर करती है।

किन जोखिमों पर नज़र रखें?

इस मर्जर की सफलता NCLT और अन्य वैधानिक मंजूरी मिलने पर निर्भर करती है। JV के मामले में, विदेशी पार्टनर के साथ इंटीग्रेशन को मैनेज करना और मैन्युफैक्चरिंग को कुशलतापूर्वक बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा।

साथियों से तुलना

जहां कई आईवियर कंपनियां रिटेल और डिस्ट्रीब्यूशन पर ध्यान केंद्रित करती हैं, वहीं मेटल फ्रेम जैसे कंपोनेंट्स के लिए इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग स्थापित करना Lenskart को एक रणनीतिक बढ़त देता है। यह कदम Lenskart को तीसरे पक्ष के आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहने वाले प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अपनी सप्लाई चेन लागत और उत्पाद की गुणवत्ता पर अधिक नियंत्रण हासिल करने की स्थिति में ला सकता है।

प्रासंगिक आंकड़े

31 मार्च, 2026 तक Lenskart Solutions का अनुमानित टर्नओवर ₹5,247.84 करोड़ है। इसी अवधि के लिए Dealskart Online का अनुमानित टर्नओवर ₹624.77 करोड़ और Lenskart Eyetech का ₹31.24 करोड़ है। JV की शुरुआती पेड-अप कैपिटल ₹1 लाख प्रस्तावित है।

आगे क्या देखना है?

निवेशकों को मर्जर के लिए NCLT और अन्य वैधानिक मंजूरियों की प्रगति पर नजर रखनी चाहिए। JV के परिचालन शुरू होने और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता से जुड़ी अपडेट्स भी महत्वपूर्ण होंगी।

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