Lenskart Solutions दो सब्सिडियरी कंपनियों को अपने में मिला रही है और चीन की Mingfeng Glassesworld के साथ मिलकर भारत में मेटल चश्मे के फ्रेम बनाने के लिए एक ज्वाइंट वेंचर (JV) का गठन कर रही है। इस कदम से कंपनी के ऑपरेशन्स सुव्यवस्थित होंगे और 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा मिलेगा।
Lenskart Solutions का बड़ा रीस्ट्रक्चरिंग प्लान
Lenskart Solutions Limited ने अपनी पूरी तरह से अपनी मालिकी वाली सब्सिडियरी कंपनियों, Dealskart Online Services Private Limited और Lenskart Eyetech Private Limited को पैरेंट कंपनी में मर्ज करने का फैसला किया है। इसके साथ ही, Lenskart चीन की Mingfeng Glassesworld Limited (MGL) के साथ मिलकर भारत में मेटल स्पेक्टेकल फ्रेम बनाने के लिए एक ज्वाइंट वेंचर (JV) भी स्थापित करेगी।
क्या हुआ है?
Lenskart Solutions के बोर्ड ने Dealskart Online Services और Lenskart Eyetech को Lenskart Solutions में मिलाने की योजना को मंजूरी दे दी है। यह विलय 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने की उम्मीद है। इसके अलावा, कंपनी ने MGL के साथ मिलकर 'Lenskart Metalframes Private Limited' नाम से एक ज्वाइंट वेंचर बनाने को भी मंजूरी दी है। इस JV में Lenskart की 80% हिस्सेदारी होगी, जबकि MGL की 20% हिस्सेदारी रहेगी। इस JV का मुख्य उद्देश्य भारत में मेटल स्पेक्टेकल फ्रेम का निर्माण करना होगा।
यह क्यों मायने रखता है?
निवेशकों के लिए, यह विलय एक सरल कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर की ओर इशारा करता है, जिससे कंप्लायंस कॉस्ट कम होगी और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ेगी। यह ज्वाइंट वेंचर, मेटल फ्रेम के लिए डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में एक स्ट्रैटेजिक कदम है। इससे सप्लाई चेन पर बेहतर कंट्रोल, क्वालिटी में सुधार और इंपोर्ट पर निर्भरता कम होने की संभावना है, जो लंबे समय में कंपनी के मार्जिन्स और सप्लाई चेन की मजबूती को प्रभावित कर सकता है।
क्या बदलेगा?
जरूरी रेगुलेटरी अप्रूवल मिलने के बाद, कंपनी का कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर और सरल हो जाएगा। ज्वाइंट वेंचर मेटल स्पेक्टेकल फ्रेम के लिए मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू करेगा। Lenskart ने नए JV में अपनी 80% हिस्सेदारी के लिए ₹80,000 के शुरुआती निवेश का प्रस्ताव दिया है।
ध्यान रखने योग्य जोखिम
निवेशकों को NCLT जैसी अथॉरिटीज से मर्जर के लिए जरूरी रेगुलेटरी अप्रूवल मिलने की प्रक्रिया पर नज़र रखनी चाहिए। ज्वाइंट वेंचर की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह कितनी प्रभावी ढंग से मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन्स स्थापित कर पाता है, लागतों का प्रबंधन कर पाता है और अपेक्षित सप्लाई चेन एफिशिएंसी हासिल कर पाता है। JV पार्टनर पर निर्भरता भी कुछ जोखिम पैदा कर सकती है।
भविष्य की राह
निवेशकों को मर्जर के लिए रेगुलेटरी अप्रूवल प्रक्रिया पर अपडेट पर करीब से नजर रखनी चाहिए। ज्वाइंट वेंचर के लिए, मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन्स शुरू होने की समय-सीमा और डोमेस्टिक प्रोडक्शन व सप्लाई चेन को मजबूत करने के लक्ष्यों को प्राप्त करने पर ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा।
