Laser Power & Infra: IPO के बाद कंपनी पर ₹0 कर्ज! पहली तिमाही में रेवेन्यू **15%** बढ़ा

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Laser Power & Infra: IPO के बाद कंपनी पर ₹0 कर्ज! पहली तिमाही में रेवेन्यू **15%** बढ़ा

Laser Power & Infra ने पहली तिमाही (Q1 FY27) में **15%** की ग्रोथ के साथ **₹521.5 करोड़** का रेवेन्यू दर्ज किया है। IPO के बाद कंपनी ने अपना कर्ज काफी हद तक चुका दिया है, जिससे अब नेट डेट लगभग शून्य हो गया है और ब्याज के खर्चों में भी भारी बचत की उम्मीद है। कंपनी अब एडवांस कंडक्टर टेक्नोलॉजी पर फोकस कर रही है और उसके पास EPC प्रोजेक्ट्स का एक मजबूत ऑर्डर बुक भी है।

Laser Power & Infra: IPO के बाद कंपनी मालामाल, अब ₹0 कर्ज! पहली तिमाही में रेवेन्यू 15% बढ़ा

Laser Power & Infra ने पहली तिमाही (Q1 FY27) में शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले लगभग 15% बढ़कर ₹521.5 करोड़ हो गया है।

**क्या है खास?

कंपनी के मैनेजमेंट ने कॉस्ट कटिंग और नए टेक्नोलॉजी पर फोकस किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, EBITDA में लगभग 26% की जोरदार बढ़ोतरी हुई और यह ₹65.9 करोड़ तक पहुंच गया। EBITDA मार्जिन 110 बेसिस पॉइंट बढ़कर 12.6% हो गया। वहीं, प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) में लगभग 27% की तेजी आई और यह ₹28.6 करोड़ रहा। कंपनी ने पहली तिमाही में ₹21.1 करोड़ का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) दर्ज किया।

IPO का कितना असर?

ये नतीजे इसलिए भी अहम हैं क्योंकि ये कंपनी के हालिया IPO के तुरंत बाद आए हैं। Laser Power & Infra ने IPO से मिले करीब ₹490 करोड़ का इस्तेमाल अपने बकाया लोन को चुकाने में किया। इसके चलते कंपनी का ग्रॉस डेट घटकर लगभग ₹360 करोड़ रह गया है, जबकि ₹240 करोड़ फिक्स्ड डिपॉजिट में रखे हुए हैं। डेट कम होने से कंपनी पर अब नेट डेट लगभग शून्य है और आने वाले समय में ब्याज के खर्चों में सालाना करीब ₹40 करोड़ की बचत होने का अनुमान है।

भविष्य की रणनीति

पहले कंपनी पर कर्ज का बोझ काफी ज्यादा था, लेकिन सफल IPO ने कंपनी की बैलेंस शीट को मजबूत करने में मदद की है। अब Laser Power & Infra अपनी एडवांस टेक्नोलॉजी, जैसे हाई टेंपरेचर लो सैग (HTLS) कंडक्टर, के दम पर मार्केट में अपनी पैठ बनाने और मार्केट शेयर बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

किन बातों पर रखें नजर?

हालांकि, कंपनी नई टेक्नोलॉजी पर तेजी से काम कर रही है, लेकिन उसे री-कंडक्टिंग टेंडर्स में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, EPC प्रोजेक्ट्स के साइकल के चलते इन्वेंट्री में होने वाले अस्थायी उतार-चढ़ाव पर भी नजर रखनी होगी, ताकि वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट ठीक रहे।

आगे क्या?

निवेशकों की नजर अब ₹1,250 करोड़ के टेंडर पाइपलाइन पर होगी कि यह कितनी जल्दी ऑर्डर में बदलता है। साथ ही, EPC सेगमेंट का प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण होगा, जिसमें Q1 FY27 में 129% की जबरदस्त ग्रोथ देखने को मिली थी। अमेरिका की TS Conductors के साथ मिलकर HTLS टेक्नोलॉजी का इंप्लीमेंटेशन भी एक अहम डेवलपमेंट होगा जिस पर नजर रखी जाएगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.