Larsen & Toubro (L&T) ने Q1 FY27 के लिए अपने नतीजे पेश कर दिए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) पिछले साल के मुकाबले **14%** बढ़कर **₹4,123 करोड़** हो गया है। वहीं, ऑर्डर इनफ्लो में भी **14%** की जोरदार बढ़ोतरी देखी गई है, जो **₹108,014 करोड़** तक पहुंच गया है।
L&T ने Q1 FY27 में दर्ज की शानदार ग्रोथ
इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी Larsen & Toubro (L&T) ने 30 जून 2026 को समाप्त हुई पहली तिमाही (Q1 FY27) के लिए अपने नतीजे घोषित कर दिए हैं। कंपनी ने 14% की सालाना बढ़ोतरी के साथ ₹4,123 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट (PAT) दर्ज किया है। इस दौरान कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 7% बढ़कर ₹67,942 करोड़ रहा।
ऑर्डर बुक में भी बंपर उछाल
तिमाही के दौरान L&T को ₹108,014 करोड़ के नए ऑर्डर मिले, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 14% ज्यादा हैं। इसके साथ ही, कंपनी की कंसोलिडेटेड ऑर्डर बुक ₹778,954 करोड़ पर पहुंच गई है। यह मजबूत ऑर्डर इनफ्लो कंपनी की मजबूत एग्जीक्यूशन क्षमता और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी अच्छा प्रदर्शन करने की काबिलियत को दर्शाता है।
'लक्ष्य 2031' की ओर बढ़ता कदम
L&T अपनी 'लक्ष्य 2031' रणनीति के तहत कंपनी के पुनर्गठन पर काम कर रही है। इसके तहत, कंपनी ने अपने रिपोर्टिंग सेगमेंट को नए सिरे से बांटा है ताकि फोकस और फुर्ती बढ़ाई जा सके। इसके अलावा, कंपनी अपने नॉन-कोर एसेट्स को बेचकर पोर्टफोलियो को सुव्यवस्थित करने और कैपिटल एफिशिएंसी को बेहतर बनाने पर भी काम कर रही है। हाल ही में Nabha Power Limited की बिक्री और Hyderabad Metro Rail सब्सिडियरी को बेचने का समझौता इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।
नए सेगमेंट स्ट्रक्चर और मर्जर
1 अप्रैल 2026 से, L&T ने सात नए रिपोर्टिंग सेगमेंट लागू किए हैं: इंफ्रास्ट्रक्चर और यूटिलिटीज, एनर्जी - कन्वेंशनल, एनर्जी - ग्रीन, मैन्युफैक्चरिंग और प्रोडक्ट्स, टेक्नोलॉजी, प्लेटफॉर्म्स और सर्विसेज, फाइनेंशियल सर्विसेज, रियलिटी, और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स। इसके साथ ही, कंपनी ने L&T Power Development Limited के पैरेंट कंपनी में विलय को भी मंजूरी दे दी है। Hyderabad Metro Rail सब्सिडियरी की बिक्री सितंबर 2026 तक पूरी होने की उम्मीद है।
जोखिम और आगे की राह
कंपनी मैनेजमेंट ने सप्लाई चेन में रुकावट, बढ़ती ऊर्जा की कीमतें और करेंसी में उतार-चढ़ाव जैसे संभावित जोखिमों को स्वीकार किया है। इंफ्रास्ट्रक्चर, यूटिलिटीज और मैन्युफैक्चरिंग सेगमेंट में मार्जिन पर दबाव, और वाटर ट्रीटमेंट बिजनेस में एग्जीक्यूशन चुनौतियां कुछ प्रमुख चिंताएं हैं। सोलर बिजनेस में सप्लाई चेन की दिक्कतें भी नजर रखने वाली बात हैं। निवेशकों की नजर कंपनी की मार्जिन दबाव को मैनेज करने की क्षमता, विनिवेश की प्रक्रिया और वैश्विक जोखिमों से निपटने की रणनीति पर रहेगी।
