Kirloskar Oil Engines के लिए एक बड़ा झटका, कंपनी ESOP पूल को **14 लाख** से बढ़ाकर **15 लाख** करने में नाकाम रही। प्रस्ताव को **75%** की जरूरी सुपरमेजॉरिटी के बजाय सिर्फ **70.35%** वोट मिले।
क्या हुआ?
Kirloskar Oil Engines Limited (KOEL) ने पोस्टल बैलेट के जरिए अपने 'KOEL ESOP 2019' स्कीम के तहत ग्रांट पूल में 1,00,000 ऑप्शंस जोड़ने का प्रस्ताव रखा था। 20 सितंबर, 2026 को वोटिंग खत्म होने के बाद जो नतीजे सामने आए, उनमें कंपनी को भारी निराशा हाथ लगी है।
वोटिंग का गणित (Voting Breakdown)
इस विशेष प्रस्ताव के लिए कुल 10,73,82,507 वैध वोट डाले गए थे। इसमें से 7,55,45,159 वोट (जो कि 70.35% हैं) प्रस्ताव के पक्ष में थे, जबकि 3,18,37,348 वोट (लगभग 29.65%) इसके खिलाफ गए। कंपनी को इसे पास कराने के लिए 75% वोट चाहिए थे, जिसे वह हासिल नहीं कर सकी। इसके अलावा, 13 सदस्यों के करीब 8,80,416 वोट या तो इनवैलिड रहे या फिर उन्होंने वोटिंग से परहेज किया।
निवेशकों की चिंता
यह असफलता सीधे तौर पर शेयरधारकों की नाराजगी को दर्शाती है। हालांकि मैनेजमेंट का उद्देश्य कर्मचारियों को रिटेन (Retain) करना था, लेकिन निवेशकों को इक्विटी डाइल्यूशन (Equity Dilution) का डर सता रहा है। अब कंपनी को अपनी इस कंपनसेशन स्ट्रैटेजी पर दोबारा काम करना होगा। अब बाजार की नजरें इस पर टिकी हैं कि बोर्ड आगे क्या कदम उठाता है और क्या वे इस प्रस्ताव में कोई बदलाव लाते हैं।
