Kirloskar Brothers Limited ने वित्त वर्ष **2027** की दूसरी तिमाही के लिए शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू **24%** बढ़कर **₹1,277 करोड़** पहुंच गया है, जिसे मुख्य रूप से न्यूक्लियर पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर से मिले बड़े ऑर्डर्स का सहारा मिला है।
मुनाफे और ग्रोथ का गणित
Kirloskar Brothers Limited (KBL) ने दूसरी तिमाही में मजबूत फाइनेंशियल परफॉर्मेंस दिखाई है। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू बढ़कर ₹1,277 करोड़ (यानी ₹12,767 मिलियन) रहा। वहीं, स्टैंडअलोन बिजनेस की बात करें तो कंपनी ने 23% की रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की और नेट प्रॉफिट (PAT) में 45% का उछाल देखने को मिला, जो ₹54.4 करोड़ (₹544 मिलियन) तक पहुंच गया।
क्यों है यह परफॉर्मेंस खास?
कंपनी के लिए सबसे बड़ी खबर उसकी ऑर्डर बुक है। कंसोलिडेटेड ऑर्डर इनटेक में 68% की भारी बढ़ोतरी हुई है, जो कुल ₹2,047 करोड़ (₹20,472 मिलियन) पहुंच गया है। कंपनी को न्यूक्लियर पावर, ऑयल एंड गैस, और डेटा सेंटर्स जैसे सेक्टरों से बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स मिले हैं। खास तौर पर न्यूक्लियर सेक्टर के लिए 'कैंड मोटर पंप' और सेफ्टी पैकेज की मांग कंपनी के लिए गेम चेंजर साबित हो रही है।
मार्जिन पर दबाव और चुनौतियां
ग्रोथ के बीच कंपनी को लागत के मोर्चे पर चुनौती का सामना करना पड़ा है। रॉ मटेरियल जैसे कॉपर, गन मेटल और स्टील की बढ़ती कीमतों के कारण कंसोलिडेटेड EBITDA मार्जिन 11.2% पर सीमित रहा। इसके अलावा, कुछ इंटरनेशनल सर्विस कॉन्ट्रैक्ट्स में साइट इवैल्यूएशन की देरी भी देखने को मिली है, जिसका असर शॉर्ट-टर्म एग्जीक्यूशन पर पड़ा है।
आगे क्या होगा?
कंपनी मैनेजमेंट ने स्पष्ट किया है कि वे प्राइस-लीडरशिप की स्थिति में हैं, इसलिए बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने की कोशिश की जाएगी। निवेशकों की नजर अब वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही (H2) पर होगी, जहां मैनेजमेंट को मार्जिन में सुधार और रिकवरी की पूरी उम्मीद है।
