Kiri Industries का ₹13,000 करोड़ का नया दांव
Kiri Industries ने अपने पारंपरिक डाईज और केमिकल्स बिजनेस से हटकर कॉपर और फर्टिलाइजर मैन्युफैक्चरिंग में उतरने की घोषणा की है। कंपनी इस नए वेंचर के लिए पूरे ₹13,000 करोड़ का भारी-भरकम कैपिटल एक्सपेंडिचर (CAPEX) करेगी। कंपनी ने हाल ही में अपने फाइनेंशियल ईयर 2026 के नतीजे पेश किए हैं, जिसमें स्टैंडअलोन रेवेन्यू ₹778 करोड़ और कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू ₹840 करोड़ रहा। वहीं, एडजस्टेड EBITDA स्टैंडअलोन ₹79 करोड़ और कंसॉलिडेटेड ₹127 करोड़ दर्ज किया गया।
यह बड़े बदलाव क्यों?
यह ₹13,000 करोड़ का निवेश Kiri Industries के लिए एक बड़े ट्रांसफॉर्मेशन का संकेत है। कंपनी का लक्ष्य अप्रैल 2027 से फेज-वाइज ऑपरेशन शुरू करना है, जिसे दो साल में पूरा किया जाएगा। यह महत्वाकांक्षी योजना भविष्य में कंपनी की ग्रोथ को रफ्तार दे सकती है। हालांकि, इसमें भारी डेट (कर्ज) और एग्जीक्यूशन रिस्क भी शामिल है। निवेशकों को लंबी अवधि की संभावनाओं और तत्काल वित्तीय दबाव के बीच संतुलन साधना होगा।
कंपनी की पिछली राह
Kiri Industries का इतिहास डाईज और केमिकल्स सेक्टर में रहा है। अब कंपनी अपनी वित्तीय स्थिति का फायदा उठाकर कॉपर और फर्टिलाइजर जैसे नए, कैपिटल-इंटेंसिव सेक्टर में कदम रख रही है। एसोसिएट्स और जॉइंट वेंचर्स से मिला मुनाफा (जो कि ₹188 करोड़ था, खासकर DyStar इन्वेस्टमेंट के कारण) रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह नए प्रोजेक्ट्स के लिए पूंजी जुटाने में मदद करेगा। हालांकि, FY26 के नतीजों पर लगभग ₹114 करोड़ के नॉन-कैश एडजस्टमेंट का भी असर पड़ा।
अब क्या बदलेगा?
इस ग्रोथ फेज को फंड करने के लिए कंपनी ने कंजर्वेटिव कैश पॉलिसी अपनाई है। यही वजह है कि मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के लिए किसी भी डिविडेंड या बायबैक की घोषणा नहीं की गई है। मैनेजमेंट ने साफ किया है कि प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन के लिए कैश बचाने की यह रणनीति जारी रहेगी। कंपनी का अनुमान है कि कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए 2027-28 तक कुल डेट ₹8,000 करोड़ से ₹9,000 करोड़ तक पहुंच सकता है।
जोखिमों पर एक नज़र
सबसे बड़ा कंसर्न ₹8,000-₹9,000 करोड़ तक पहुंचने वाला अनुमानित डेट है, जो बैलेंस शीट के लिए बड़ा रिस्क पैदा कर सकता है। बड़े पैमाने पर ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट के एग्जीक्यूशन में भी स्वाभाविक जोखिम होते हैं। मैनेजमेंट का कहना है कि 50% से कम ऑपरेशनल कैपेसिटी डेट सर्विसिंग को चुनौती दे सकती है। इसके अलावा, नई डोमेस्टिक कैपेसिटी के बावजूद, भारत 2030-2035 तक कॉपर प्रोसेसिंग के लिए आयात पर निर्भर रहने की उम्मीद है।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को ₹13,000 करोड़ के कॉपर और फर्टिलाइजर प्रोजेक्ट की प्रगति पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। इसमें CAPEX का ड्रॉडाउन और अप्रैल 2027 से फेज्ड ऑपरेशंस का शुरू होना शामिल है। कैपेसिटी यूटिलाइजेशन, डेट लेवल और कंपनी की बढ़ते डेट को सर्व करने की क्षमता पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
