Kiri Industries ने गुजरात के जाफराबाद में अपने नए कॉपर और फर्टिलाइजर कॉम्प्लेक्स का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। **₹13,300 करोड़** के इस बड़े प्रोजेक्ट के जरिए कंपनी अपने केमिकल बिजनेस से हटकर एक डायवर्सिफाइड इंडस्ट्रियल प्लेयर बनने की राह पर है।
एक नया अध्याय और बड़ा विजन
Kiri Industries अब केमिकल सेक्टर से निकलकर भारी उद्योगों की तरफ बढ़ रही है। कंपनी ने इस मेगा प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए दो नई सब्सिडियरी, Indo Asia Copper Limited (IACL) और IndoAsia Agrotech Fertilizers Limited (IAFL) बनाई हैं। ₹13,300 करोड़ का यह निवेश कॉपर मैन्युफैक्चरिंग, फर्टिलाइजर प्रोडक्शन और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे जेटी और रिन्यूएबल पावर) पर केंद्रित होगा। इसका निर्माण कार्य 1 अक्टूबर 2025 से शुरू हो चुका है और इसे 36 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य है।
क्यों है यह फैसला अहम?
कंपनी ने अपने DyStar इन्वेस्टमेंट को बेचकर USD 689 मिलियन की भारी लिक्विडिटी जुटाई है, जिसने बैलेंस शीट को काफी मजबूत किया है। अब कंपनी अपने 'सल्फर डाइऑक्साइड' बाई-प्रोडक्ट का इस्तेमाल फर्टिलाइजर बनाने में करके एक 'सर्कुलर इकोनॉमिक मॉडल' तैयार करना चाहती है। Q2 FY27 में कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू ₹2,985 मिलियन रहा, जबकि H1 FY27 में नेट प्रॉफिट ₹2,313 मिलियन दर्ज किया गया। हालांकि, इस भारी-भरकम प्रोजेक्ट के कारण कंपनी को Q2 में ₹387 मिलियन का नेट लॉस भी झेलना पड़ा है।
निवेशकों के लिए रिस्क और आगे की राह
निवेशकों को अब इसके एग्जीक्यूशन पर नजर रखनी होगी। यह प्रोजेक्ट कंपनी के पारंपरिक बिजनेस के मुकाबले कहीं बड़ा है, इसलिए समय पर काम पूरा करना सबसे बड़ी चुनौती होगी। साथ ही, अब कंपनी का प्रदर्शन ग्लोबल कॉपर कमोडिटी साइकल और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर की डिमांड पर भी निर्भर करेगा। मैनेजमेंट को अब ₹4,000 करोड़ के नियोजित इक्विटी कॉन्ट्रिब्यूशन को सही तरीके से डिप्लॉय करना होगा, ताकि लंबी अवधि में वैल्यू क्रिएशन हो सके।
