Kilburn Office Automation Ltd के लिए फाइनेंशियल ईयर 2026 कठिन रहा। कंपनी का रेवेन्यू शून्य (nil) रहा और उसे **₹30.95 लाख** का नेट लॉस हुआ है। कंपनी अब इन्सॉल्वेंसी प्रक्रिया से बाहर निकलकर स्टील, एग्रीकल्चर और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर में बिजनेस शिफ्ट करने की योजना बना रही है।
खस्ताहाल कामकाज और भविष्य की रणनीति
कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026 के जो नतीजे जारी किए हैं, उसमें ऑपरेशंस से कोई कमाई नहीं हुई है। कंपनी का नेट लॉस ₹30.95 लाख दर्ज किया गया है, जिसका मुख्य कारण एडमिनिस्ट्रेटिव और कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के खर्च रहे हैं।
क्यों है यह खबर अहम?
पोस्ट-CIRP दौर में कंपनी अब एक बड़ा बदलाव करने की फिराक में है। बोर्ड कंपनी के 'ऑब्जेक्ट क्लॉज' में बदलाव कर स्टील प्रोडक्ट्स, पावर जनरेशन, एग्रीकल्चर और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में कदम रखने की तैयारी कर रहा है। साथ ही, एडमिनिस्ट्रेटिव सुधार के लिए कंपनी अपना रजिस्टर्ड ऑफिस पश्चिम बंगाल से महाराष्ट्र शिफ्ट करना चाहती है।
गवर्नेंस और ऑडिटर की नजर
ऑडिटर्स ने गौर किया है कि फाइनेंशियल ईयर के दौरान अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर का ऑडिट ट्रेल फीचर पूरी तरह से चालू नहीं था, हालांकि इंटरनल कंट्रोल्स संतोषजनक पाए गए। 45वीं AGM के दौरान मिस्टर गौरव कासत (CFO और होल-टाइम डायरेक्टर) के साथ-साथ सुश्री नेहा पुनीत अग्रवाल और सुश्री प्रतीक्षा संतोष राठी की नियुक्तियों को नियमित कर दिया गया है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
अब सबकी नजरें 30 सितंबर, 2026 को होने वाली AGM पर टिकी हैं। स्टील और पावर जैसे कैपिटल-इंटेंसिव सेक्टर में उतरने के लिए कंपनी को भारी निवेश की जरूरत होगी। कंपनी के शेयरहोल्डर्स अब यह देखेंगे कि इस डोर्मेंट स्थिति से बाहर निकलने के लिए मैनेजमेंट की ओर से क्या ठोस रोडमैप पेश किया जाता है।
