Kalyani Forge ने FY26 के लिए **9.32 करोड़ रुपये** का मुनाफा दर्ज किया है, जो पिछले साल के मुकाबले **12%** अधिक है। हालांकि, कंपनी की बैलेंस शीट पर ऑडिटर ने 'डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन' (Disclaimer of Opinion) जारी कर दिया है, जो कंपनी के इंटरनल कंट्रोल और इन्वेंट्री वैल्युएशन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में संपन्न हुई 47वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में कंपनी ने अपने FY26 के नतीजों के साथ 4 रुपये प्रति शेयर के डिविडेंड का ऐलान किया। कंपनी ने कम मार्जिन वाले 40 करोड़ रुपये के बिजनेस से बाहर निकलकर अपने EBITDA मार्जिन को 13.3% तक सुधारने में सफलता हासिल की है।
क्यों घबराए हैं निवेशक?
ऑडिटर का 'डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन' कोई छोटी बात नहीं है। इसका सीधा मतलब है कि ऑडिटर कंपनी के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स की सटीकता की पुष्टि करने में असमर्थ रहे हैं। इन्वेंट्री, ट्रेड रिसीवेबल्स, ट्रेड पेबल्स और GST इनपुट टैक्स क्रेडिट जैसे अहम मामलों में दस्तावेजीकरण की कमी पाई गई है। यह स्थिति कंपनी के फाइनेंशियल गवर्नेंस पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।
निवेशकों के लिए जोखिम
फिलहाल, कंपनी अपने इंटरनल फाइनेंशियल कंट्रोल्स को अपडेट कर रही है। ट्रेड बैलेंस और GST इनपुट्स का मिलान न हो पाना एक बड़ा रिस्क है, क्योंकि इससे भविष्य की रिपोर्टिंग की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है।
आगे क्या देखें?
शेयरधारकों को अब कंपनी के 'क्लीन ऑडिट रोडमैप' पर नजर रखनी चाहिए। इन्वेंट्री वैल्युएशन और बैलेंस रिकॉन्सिलिएशन से जुड़ी समस्याओं को कंपनी कितनी जल्दी सुलझाती है, यही स्टॉक के लॉन्ग-टर्म भविष्य के लिए सबसे बड़ा इंडिकेटर होगा।
