KSB Ltd ने H1 2026 के लिए **₹1,292 करोड़** का रेवेन्यू और **₹146.5 करोड़** का EBITDA रिपोर्ट किया है। जियोपॉलिटिकल तनाव और प्रोजेक्ट्स में देरी के बावजूद कंपनी का ऑर्डर बुक **₹2,744.5 करोड़** पर मजबूत बना हुआ है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर एक नजर
KSB Ltd ने चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही के लिए अपने आंकड़े जारी किए हैं, जहां कंपनी का रेवेन्यू ₹1,292 करोड़ और EBITDA ₹146.5 करोड़ रहा है। कंपनी का कुल ऑर्डर बुक ₹2,744.5 करोड़ का है, जिसमें अकेले न्यूक्लियर सेगमेंट की हिस्सेदारी ₹1,235 करोड़ की है। हालांकि, ग्लोबल लेवल पर जारी जियोपॉलिटिकल तनाव और न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स के टेस्टिंग शेड्यूल में देरी के कारण परफॉर्मेंस थोड़ी धीमी रही।
आगे की राह और ग्रोथ के संकेत
मैनेजमेंट ने दूसरी छमाही (H2) में डबल-डिजिट ग्रोथ हासिल करने का लक्ष्य रखा है। कंपनी अब वाटर, वेस्ट-वाटर, रेलवे और डेटा सेंटर्स जैसे नए क्षेत्रों में अपने पैर पसार रही है। शिरवल (Shirwal) फैसिलिटी में 20% की कैपेसिटी एक्सपेंशन की गई है, जिससे भविष्य की डिमांड को पूरा करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, अगले साल की शुरुआत में SAP HANA के इम्प्लीमेंटेशन की तैयारी है।
किन रिस्क फैक्टर्स पर रखें नजर?
न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स का एग्जीक्यूशन टेस्टिंग बेड की उपलब्धता पर काफी हद तक निर्भर करता है, जो एक बड़ा रिस्क फैक्टर है। साथ ही, कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और जियोपॉलिटिकल संघर्षों के कारण एक्सपोर्ट बिजनेस के अनुमानों में अनिश्चितता बनी हुई है।
इन्वेस्टर्स क्या ट्रैक करें?
सितंबर 2026 में GHAVP प्रोजेक्ट के लिए टेस्टिंग शुरू होना कंपनी के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। इसके साथ ही, KUSUM 2.0 स्कीम में देरी के बाद सोलर बिजनेस में होने वाली रिकवरी और एक्सपोर्ट ऑर्डर्स के एग्जीक्यूशन की गति पर निवेशकों की नजर होनी चाहिए।
