KNR Constructions के लिए फाइनेंशियल ईयर 2026 चुनौतीपूर्ण रहा है। कंपनी का रेवेन्यू **43%** और नेट प्रॉफिट **56%** तक लुढ़क गया है। सड़क निर्माण क्षेत्र में सुस्ती के बीच कंपनी अब माइनिंग कारोबार पर बड़ा दांव लगा रही है, जो अब उनके ऑर्डर बुक का **41%** हिस्सा है।
मुनाफे और रेवेन्यू में बड़ी गिरावट
फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में कंपनी का कुल रेवेन्यू घटकर ₹2,698 करोड़ रह गया है, जो पिछले साल ₹4,753 करोड़ था। इसी तरह, नेट प्रॉफिट भी ₹1,001 करोड़ से गिरकर ₹436.8 करोड़ के स्तर पर आ गया है। कंपनी का EBITDA मार्जिन भी पिछले साल के 34.2% से कम होकर 26.4% पर सिमट गया है।
क्यों बदली रणनीति?
सड़क निर्माण (Road Sector) में प्रोजेक्ट्स मिलने की रफ्तार धीमी होने और सिंचाई परियोजनाओं (Irrigation Projects) के पूरा होने के कारण कंपनी को इस दबाव का सामना करना पड़ा है। अब कंपनी अपना पूरा फोकस कमर्शियल माइनिंग, जैसे कि बन्हारडीह कोल माइनिंग ब्लॉक पर कर रही है। इसके साथ ही, कंपनी 4 HAM एसेट्स को Indus Infra Trust को बेचकर अपनी नकदी (Cash) बढ़ाने की योजना बना रही है।
आगे की राह और जोखिम
कंपनी ने अगले फाइनेंशियल ईयर (FY27) के लिए ₹8,000 करोड़ से ₹10,000 करोड़ के नए ऑर्डर पाने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, निवेशकों को सिंचाई परियोजनाओं से मिलने वाले बकाया पेमेंट (Outstanding dues) और माइनिंग प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी पर्यावरणीय मंजूरी (Environmental Clearance) में लगने वाले समय पर नजर रखनी होगी।
