KEI Industries का बड़ा ऐलान! राजस्थान में ₹700 करोड़ का नया प्लांट, क्षमता में होगा 50% का इजाफा

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
KEI Industries का बड़ा ऐलान! राजस्थान में ₹700 करोड़ का नया प्लांट, क्षमता में होगा 50% का इजाफा

KEI Industries ने अपने वायर्स और केबल्स डिवीजन की क्षमता बढ़ाने के लिए राजस्थान में ₹700 करोड़ के बड़े निवेश को मंजूरी दे दी है। इस नए यूनिट से केबल की क्षमता **50,000 KMS** और GI वायर की क्षमता **40,000 MT** बढ़ेगी। इस प्रोजेक्ट के लिए फंड कंपनी के इंटरनल एक्रुअल्स से आएगा।

KEI Industries का ₹700 करोड़ का बड़ा कदम

KEI Industries ने अपने वायर्स और केबल्स (Wires and Cables) डिवीजन के मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का विस्तार करने के लिए लगभग ₹700 करोड़ के बड़े निवेश को मंजूरी दी है। इस पैसे से राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले के सलेरपुर में एक नया यूनिट स्थापित किया जाएगा। उम्मीद है कि यह नया यूनिट सितंबर 2028 तक फेज मैनर में चालू हो जाएगा।

क्यों महत्वपूर्ण है यह विस्तार?

यह कदम KEI Industries की बढ़ती मार्केट डिमांड को पूरा करने और अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बढ़ाने की रणनीति को दिखाता है। सबसे खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट के लिए पूरा फंड कंपनी के इंटरनल एक्रुअल्स (Internal Accruals) से आएगा। इसका मतलब है कि कंपनी पर कर्ज का बोझ नहीं बढ़ेगा और यह एक डी-रिस्क्ड ग्रोथ स्ट्रेटेजी है। GI वायर प्रोडक्शन में बैकवर्ड इंटीग्रेशन (Backward Integration) से कंपनी को कॉस्ट कंट्रोल और सप्लाई चेन को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

मौजूदा क्षमताएं

30 जून 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, KEI Industries के पास केबल्स के लिए 2,60,732 KMS की क्षमता थी, जिसमें 72% यूटिलाइजेशन हो रहा था। इसके अलावा, कम्युनिकेशन केबल्स की 28,800 KMS (45% यूटिलाइजेशन), हाउस वायर्स/वाइंडिंग वायर्स की 23,89,400 KMS (61% यूटिलाइजेशन), और स्टेनलेस स्टील (SS) वायर्स की 9,000 MT (91% यूटिलाइजेशन) की क्षमता थी। SS वायर्स में 91% का हाई यूटिलाइजेशन यह दर्शाता है कि कुछ प्रोडक्ट्स की डिमांड पहले से ही बहुत मजबूत है।

क्या बदलेगा?

राजस्थान में लगने वाला नया यूनिट KEI Industries की प्रोडक्शन कैपेबिलिटी को काफी बढ़ाएगा। 50,000 KMS केबल कैपेसिटी और 40,000 MT GI वायर्स का जुड़ना कंपनी की मार्केट रीच और कॉम्पिटिटिव पोजिशन को मजबूत करेगा। सितंबर 2028 तक फेज्ड ऑपरेशनल स्टार्ट होने से धीरे-धीरे इंटीग्रेशन और रैंप-अप संभव हो पाएगा।

ध्यान रखने योग्य बातें (Risks)

इन्वेस्टर्स को इस प्रोजेक्ट के एग्जीक्यूशन टाइमलाइन पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। अगर सितंबर 2028 तक फेज्ड कमीशनिंग में कोई देरी होती है, तो इससे अपेक्षित लाभ और मार्केट रिएक्शन प्रभावित हो सकता है। GI वायर प्रोडक्शन के स्मूथ इंटीग्रेशन को सुनिश्चित करना भी कॉस्ट एफिशिएंसी हासिल करने के लिए बहुत ज़रूरी होगा।

आगे क्या देखें?

इन्वेस्टर्स को राजस्थान में नए यूनिट के कंस्ट्रक्शन और कमीशनिंग की प्रगति पर नियमित अपडेट्स देखने चाहिए। कंपनी की फाइनेंशियल रिपोर्ट्स में इंटरनल एक्रुअल्स से फंड होने की पुष्टि पर नजर रखना और भविष्य के क्वार्टर्स में नई कैपेसिटी का रेवेन्यू और प्रॉफिटेबिलिटी पर असर ट्रैक करना महत्वपूर्ण होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.