K M Sugar Mills के बोर्ड ने अपने डिस्टिलरी बिज़नेस को एक नई कंपनी में अलग करने की मंजूरी दे दी है। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 26 के लिए **50.3%** सालाना बढ़त के साथ **₹53.42 करोड़** का आफ्टर-टैक्स प्रॉफिट दर्ज किया है। इस बार कोई डिविडेंड (Dividend) नहीं दिया जाएगा।
K M Sugar Mills का बड़ा फैसला: डिस्टिलरी डिवीज़न अलग होगा
K M Sugar Mills लिमिटेड के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने कंपनी के डिस्टिलरी डिवीजन को एक अलग, पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी 'KM Spirits and Allied Industries Limited' में ट्रांसफर करने की स्कीम को मंजूरी दे दी है। यह डीमर्जर 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने की उम्मीद है। इस बड़े फैसले के साथ ही, कंपनी ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए शानदार नतीजे पेश किए हैं, जिसमें मुनाफे में भारी इज़ाफ़ा देखा गया है।
डीमर्जर से क्या फायदा?
इस डीमर्जर का मुख्य उद्देश्य डिस्टिलरी बिज़नेस को एक फोकस्ड, प्योर-प्ले एंटिटी के रूप में स्थापित करना है। माना जा रहा है कि इससे शेयरधारकों के लिए वैल्यू अनलॉक होगी और दोनों बिज़नेस सेगमेंट (शुगर और डिस्टिलरी) को अपनी ग्रोथ स्ट्रेटेजी पर अलग-अलग काम करने का मौका मिलेगा। वहीं, कंपनी ने FY 2025-26 के लिए कोई डिविडेंड नहीं देने का फैसला किया है। यह बताता है कि कंपनी भविष्य के विस्तार और डीमर्जर प्रक्रिया के लिए मुनाफे को फिर से निवेश करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
कैसा रहा कंपनी का प्रदर्शन?
फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में, K.M. Sugar Mills लिमिटेड ने ₹72.56 करोड़ का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) दर्ज किया, जो पिछले साल के ₹48.92 करोड़ की तुलना में 48.3% ज्यादा है। कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 50.3% की जोरदार उछाल देखी गई और यह ₹53.42 करोड़ तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह ₹35.55 करोड़ था। इसी तरह, अर्निंग्स पर शेयर (EPS) भी 50.5% बढ़कर ₹5.81 हो गया, जो पिछले साल ₹3.86 था।
आगे क्या बदलेगा?
इस डीमर्जर से K.M. Sugar Mills के बिज़नेस मॉडल में एक बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव आएगा, जिससे शुगर और डिस्टिलरी ऑपरेशंस अलग-अलग एंटिटीज में बंट जाएंगे। इससे ऑपरेशनल एफिशिएंसी (Operational Efficiency) बढ़ सकती है और दोनों बिजनेसेज को अलग-अलग वैल्यूएशन (Valuation) मिल सकता है। कंपनी की लॉन्ग-टर्म फैसिलिटीज के लिए क्रेडिट रेटिंग IVR A बनी हुई है।
खतरे की घंटी: किन बातों पर रहेगी नज़र?
शुगर इंडस्ट्री में प्रोडक्शन और मार्केट डिमांड के हिसाब से उतार-चढ़ाव आता रहता है। एक बड़ी चिंता यह है कि 2019 से चीनी का मिनिमम सेलिंग प्राइस (MSP) ₹31/किलो पर स्थिर है, जबकि गन्ने की फेयर एंड रेमुनरेटिव प्राइस (FRP) बढ़ गई है। इससे कंपनियों की लिक्विडिटी (Liquidity) पर दबाव पड़ रहा है। इसके अलावा, कंपनी पर कुछ लंबित मुकदमेबाजी (Litigation) और आकस्मिक देनदारियां (Contingent Liabilities) भी हैं।
बाज़ार के रुझान
हालांकि, फाइलिंग में डायरेक्ट पीयर (Peer) डेटा नहीं दिया गया है, लेकिन शुगर सेक्टर में डिस्टिलरी और इथेनॉल बिज़नेस से वैल्यू अनलॉक करने के लिए डीमर्जर एक आम रणनीति है। यह सरकार द्वारा इथेनॉल ब्लेंडिंग (Ethanol Blending) के मैंडेट (Mandate) के चलते और तेज़ हुआ है। बाकी कंपनियों को भी शुगर और इथेनॉल दोनों सेगमेंट में इसी तरह के रेगुलेटरी और प्राइसिंग चैलेंजेस का सामना करना पड़ रहा है।
कुछ ज़रूरी आंकड़े (FY26)
- कंसोलिडेटेड रेवेन्यू: ₹658.38 करोड़
- कंसोलिडेटेड PAT: ₹53.42 करोड़ (+50.3% YoY)
- प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT): ₹72.56 करोड़ (+48.3% YoY)
- EPS: ₹5.81 (+50.5% YoY)
- शुगर सेगमेंट रेवेन्यू: ₹567.80 करोड़
- डिस्टिलरी सेगमेंट रेवेन्यू: ₹91.21 करोड़
आगे क्या देखें?
निवेशकों को डिस्टिलरी डिवीज़न के डीमर्जर की प्रगति और रेगुलेटरी अप्रूवल्स (Regulatory Approvals) पर कड़ी नज़र रखनी चाहिए। चीनी की कीमतों के मुश्किल भरे माहौल में कंपनी की लिक्विडिटी मैनेजमेंट (Liquidity Management) क्षमता महत्वपूर्ण होगी। इसके साथ ही, चेयरमैन के निधन के बाद नेतृत्व में बदलाव और नए डायरेक्टर्स की नियुक्ति भी देखने लायक होगी।
