Jayant Infratech के लिए वित्त वर्ष **2026** मिला-जुला रहा। कंपनी ने रेलवे बिलिंग में देरी के बावजूद **₹8.44 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, साथ ही भविष्य की ग्रोथ के लिए **₹188.79 करोड़** के नए ऑर्डर हासिल किए हैं।
चुनौतियों के बीच भी प्रॉफिट पर टिकाव
कंपनी ने अपनी 23वीं सालाना आम बैठक (AGM) में फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के नतीजे पेश किए। ऑपरेशन्स से रेवेन्यू मामूली गिरावट के साथ ₹111.70 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹121.72 करोड़ था। हालांकि, मैनेजमेंट का कहना है कि भारतीय रेलवे के पेमेंट सिस्टम में आई तकनीकी खराबी के चलते मार्च 2026 में बिल क्लियरेंस अटक गए थे, जिसके कारण रेवेन्यू पर असर पड़ा। इसके बावजूद, कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹8.44 करोड़ पर स्थिर रहा।
नई रणनीति: रेलवे में विस्तार
इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स के अलावा कंपनी अब 'रेलवे मेंटेनेंस' के काम में उतर रही है, जो लॉन्ग-टर्म में कमाई का बड़ा जरिया बन सकता है। कंपनी की कुल वर्क बुक यानी ऑर्डर पाइपलाइन ₹512.22 करोड़ की है, जिससे आने वाली तिमाहियों में रेवेन्यू की स्थिति मजबूत दिखाई देती है। कंपनी ने नेट वर्थ को और मजबूत करने के लिए इस साल कोई डिविडेंड नहीं देने का फैसला लिया है।
कॉर्पोरेट गवर्नेंस और आगे की राह
बोर्ड ने स्वतंत्र निदेशकों के रूप में डॉ. तविंदरपाल सिंह अरोड़ा और श्रीमती आंचल अग्रवाल की नियुक्ति पर विचार किया है। साथ ही, ₹40 करोड़ तक के रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन के लिए भी मंजूरी मांगी गई है। ऑडिटर 'गुप्ता अग्रवाल एंड एसोसिएट्स' की रिपोर्ट क्लीन है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी अपने ₹512.22 करोड़ के ऑर्डर बुक को कितनी तेजी से रेवेन्यू में बदल पाती है।
