Ion Exchange India ने चालू फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही में **828 मिलियन रुपये** का कंसोलिडेटेड नेट लॉस दर्ज किया है। इसकी मुख्य वजह पुराने प्रोजेक्ट्स की लागत में बदलाव और मिडिल ईस्ट में जारी संकट के कारण सप्लाई चेन में आई रुकावटें हैं।
मुनाफे से नुकसान तक का सफर
Ion Exchange India के नतीजे निवेशकों के लिए चिंता बढ़ाने वाले रहे हैं। कंपनी ने सितंबर तिमाही में 828 मिलियन रुपये का नेट लॉस रिपोर्ट किया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में कंपनी को 499 मिलियन रुपये का मुनाफा हुआ था। कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू भी सालाना आधार पर 8.1% घटकर 6,747 मिलियन रुपये रह गया है। नतीजों पर सबसे ज्यादा असर कंपनी के 'ट्रीटमेंट सॉल्यूशंस' सेगमेंट में पुराने प्रोजेक्ट्स की लागत बढ़ने और मिडिल ईस्ट में लॉजिस्टिक्स से जुड़ी दिक्कतों की वजह से पड़ा।
मार्जिन पर दबाव
कंपनी का ऑपरेटिंग EBITDA मार्जिन नकारात्मक 12.57% पर पहुंच गया है, जो कंपनी के पिछले शानदार प्रदर्शन के मुकाबले काफी निराशाजनक है। हालांकि, कंपनी का ऑर्डर बुक अभी भी मजबूत है, जो 29,690 मिलियन रुपये पर खड़ा है।
कारोबार का हाल
जहां 'ट्रीटमेंट सॉल्यूशंस' ने मुश्किलें बढ़ाईं, वहीं कंपनी के अन्य बिजनेस में मजबूती दिखी:
- Industrial Products: इस सेगमेंट का टर्नओवर सालाना आधार पर 35% बढ़ा है।
- Specialty Chemicals: यहां भी सुधार दिखा है, हालांकि नए रोहा (Roha) प्लांट के खर्चों और इनपुट कॉस्ट के कारण मार्जिन पर दबाव बना हुआ है।
- Consumer Products: इस सेगमेंट में लगातार वॉल्यूम ग्रोथ बनी हुई है।
आगे की राह
कंपनी के सामने मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव की वजह से एक्सपोर्ट और लॉजिस्टिक्स को लेकर जोखिम अभी भी बरकरार है। निवेशकों की नजर अब कंपनी के 93,700 मिलियन रुपये के बिड पाइपलाइन पर है, जिसे कंपनी फर्म ऑर्डर्स में बदलने की कोशिश करेगी। मैनेजमेंट ने उम्मीद जताई है कि फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही (H2-FY27) में ऑर्डर्स की डिलीवरी से रेवेन्यू और मार्जिन में सुधार देखने को मिलेगा।
