The Indian Wood Products Company Ltd अपने कोर बिज़नेस से हटकर अब माइनिंग, मेटल मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में कदम रखने जा रही है। कंपनी ने इसके लिए शेयरधारकों से मंज़ूरी मांगी है।
बिज़नेस में बड़ा बदलाव
Indian Wood Products Company Ltd ने अपने मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (MOA) में बदलाव करने के लिए पोस्टल बैलट के ज़रिए शेयरधारकों से मंज़ूरी मांगी है। कंपनी का लक्ष्य 'क्लॉज 49' जोड़कर आयरन ओर, स्टील, फेरो-अलॉय और कोयले के व्यापार व मैन्युफैक्चरिंग में प्रवेश करना है।
क्यों है यह कदम अहम?
अब तक कंपनी मुख्य रूप से 'कत्था' (Katha) और 'कच' (Cutch) बनाने के कारोबार में रही है। अब कंपनी का इरादा सिविल इंजीनियरिंग, पावर हाउस डेवलपमेंट और भारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में उतरने का है। यह बदलाव कंपनी को एक नए और कैपिटल-इंटेंसिव (Capital-intensive) बिज़नेस चक्र में ले जाएगा।
वोटिंग का शेड्यूल
शेयरधारक 17 अक्टूबर 2026 से 15 नवंबर 2026 तक रिमोट ई-वोटिंग के माध्यम से अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। इसके लिए कट-ऑफ डेट 2 अक्टूबर 2026 तय की गई है। कंपनी ने पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए CS Md. Shahnawaz को नियुक्त किया है।
निवेशकों के लिए जोखिम
कंपनी ने अभी तक इन नए प्रोजेक्ट्स के लिए कोई ठोस रोडमैप या फाइनेंशियल अनुमान जारी नहीं किए हैं। माइनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे बड़े क्षेत्रों में उतरने के लिए भारी निवेश (Capex) की ज़रूरत होती है, जो कंपनी के कैश फ्लो पर दबाव डाल सकता है। इसके अलावा, मैन्युफैक्चरिंग से हेवी इंडस्ट्री में जाने की प्रक्रिया में 'एक्जीक्यूशन रिस्क' (Execution risk) भी बना रहता है।
आगे देखना होगा कि मैनेजमेंट इन नए वेंचर्स को फंड करने के लिए क्या योजना बनाता है और क्या वे अकेले इसे शुरू करेंगे या किसी के साथ जॉइंट वेंचर करेंगे।
