IRCON International ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है। कंपनी AFCONS के खिलाफ आए ₹147.14 करोड़ के आर्बिट्रेशन अवार्ड को चुनौती देगी, जिससे कंपनी की फाइनल लायबिलिटी अभी अनिश्चित बनी हुई है।
कानूनी लड़ाई का नया मोड़
IRCON International लिमिटेड ने अपने शेयरहोल्डर्स को बताया है कि वर्क पैकेज T-74R-A से जुड़े विवाद में आर्बिट्रेशन की कार्यवाही का नतीजा आ चुका है। मेजॉरिटी ट्रिब्यूनल ने कंपनी के खिलाफ ₹147.14 करोड़ का अवार्ड जारी किया है। आपको बता दें कि इस पूरे विवाद में ओरिजिनल क्लेम वैल्यू ₹359.72 करोड़ की थी, जिसका खुलासा कंपनी ने पहली बार 14 अगस्त 2023 को किया था।
मामला इतना गंभीर क्यों है?
निवेशकों की नजर इस खबर पर इसलिए है क्योंकि ट्रिब्यूनल का यह फैसला काफी बड़ा है। खास बात यह है कि माइनॉरिटी ट्रिब्यूनल की असहमति वाली राय में यह रकम केवल ₹23.64 करोड़ आंकी गई थी, लेकिन मेजॉरिटी फैसला ₹147.14 करोड़ का है। चूँकि कंपनी ने अब दिल्ली हाई कोर्ट में इसे चुनौती देने का निर्णय लिया है, इसलिए फिलहाल किसी भी तरह का कैश आउटफ्लो टल गया है, लेकिन कानूनी तलवार अभी लटकी रहेगी।
आगे क्या होगा?
अब यह मामला आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल से निकलकर ज्यूडिशियल लिटिगेशन (Judicial Litigation) के चरण में पहुंच गया है। कंपनी ने साफ कर दिया है कि कोई सेटलमेंट नहीं हुआ है और वे अवार्ड की वैधता को चुनौती देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
निवेशकों के लिए रिस्क
कंपनी के लिए सबसे बड़ा रिस्क हाई कोर्ट का फैसला है। अगर कोर्ट ट्रिब्यूनल के फैसले को बरकरार रखता है, तो कंपनी को ₹147.14 करोड़ के अलावा ब्याज और कानूनी खर्चों का बड़ा बोझ उठाना पड़ सकता है। फिलहाल, अनिश्चितता का दौर जारी है और कानूनी प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है।
