IFGL Refractories के FY26 नतीजों पर एक नज़र
IFGL Refractories का स्टैंडअलोन रेवेन्यू FY26 में 11.2% बढ़कर ₹1,109.41 करोड़ हो गया, जो पिछले साल FY25 में ₹997.63 करोड़ था। हालांकि, टैक्स के बाद कंपनी का मुनाफा ₹38.84 करोड़ पर आ गया, जो पिछले साल ₹57.60 करोड़ था। वहीं, कंसोलिडेटेड (समेकित) आधार पर रेवेन्यू ₹1,894.25 करोड़ (FY25 में ₹1,653.03 करोड़) तक पहुंचा, लेकिन कंसोलिडेटेड प्रॉफिट घटकर ₹34.70 करोड़ (FY25 में ₹42.98 करोड़) रह गया।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
कंपनी के नतीजों से टॉप-लाइन ग्रोथ तो दिख रही है, जो एक अच्छी बात है। लेकिन, असाधारण खर्च और टैक्स से जुड़े मामलों के कारण प्रॉफिट में आई कमी पर ध्यान देना जरूरी है। हालांकि, प्रस्तावित डिविडेंड यह दिखाता है कि कंपनी शेयरधारकों को रिटर्न देने के लिए प्रतिबद्ध है, भले ही मुनाफे में कमी आई हो। निवेशकों को रेवेन्यू में बढ़ोतरी और प्रॉफिट में आई कमी, साथ ही भविष्य के संभावित देनदारियों के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा।
जानिए पूरी कहानी
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए IFGL Refractories ने रेवेन्यू में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की है। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू FY26 में ₹1,894.25 करोड़ रहा, जो FY25 के ₹1,653.03 करोड़ से काफी ज्यादा है। यह ग्रोथ कंपनी के ऑपरेशन्स की एक अहम विशेषता रही है। नए लेबर कोड, जो 21 नवंबर, 2025 से लागू हुए, ने ₹5.23 करोड़ का एक असाधारण खर्च खड़ा किया है। इसके अलावा, कंपनी पिछले कुछ वर्षों से चल रहे टैक्स लिटिगेशन (कर विवाद) से भी निपट रही है।
अब आगे क्या?
FY26 के नतीजों के फाइनल होने के साथ, कंपनी अब प्रस्तावित डिविडेंड भुगतान की ओर बढ़ रही है। इस डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट 29 जुलाई, 2026 तय की गई है। 2016 के मर्जर से जुड़ा गुडविल एमोर्टाइजेशन (goodwill amortization) का चार्ज अब खत्म हो गया है। अब निवेशकों का ध्यान कंपनी की अगले वित्तीय वर्ष में प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ाने की क्षमता और चल रहे टैक्स विवादों के समाधान पर रहेगा।
जोखिम पर नज़र
लगातार टैक्स लिटिगेशन एक बड़ा जोखिम बना हुआ है। असेसमेंट ईयर (AY) 2020-21 के लिए गुडविल पर डेप्रिसिएशन (depreciation) के संबंध में ₹28.16 करोड़ के क्लेम को डिसअलाउ (disallow) कर दिया गया है। वहीं, AY 2018-19 और 2019-20 के असेसमेंट को क्रमशः ₹50.06 करोड़ और ₹37.55 करोड़ के लिए फिर से खोला गया है। कंपनी इन क्लेम्स को अपील्स और रिट पिटीशन्स के जरिए चुनौती दे रही है।
आगे क्या ट्रैक करें?
निवेशकों को चल रहे टैक्स लिटिगेशन के नतीजों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। इसके अलावा, अगले वित्तीय वर्ष में कंपनी का प्रदर्शन, खासकर रेवेन्यू ग्रोथ को बनाए रखते हुए प्रॉफिट मार्जिन में सुधार करने की उसकी क्षमता, महत्वपूर्ण होगी। प्रस्तावित डिविडेंड का भुगतान भी शेयरधारकों के लिए रुचि का विषय रहेगा।
