Horizon Reclaim (India) Ltd ने अपने नए राजकोट (यूनिट II) पायरोलिसिस ऑयल प्लांट को शुरू कर दिया है। इस विस्तार से कंपनी की कुल क्षमता बढ़कर 86,800 MTPA हो जाएगी और यह वेस्ट-टू-एनर्जी मार्केट में कदम रख चुकी है।
Horizon Reclaim ने राजकोट यूनिट II चालू की, क्षमता विस्तार
Horizon Reclaim (India) Ltd ने अपने ग्रोथ प्लान के तहत राजकोट (यूनिट II) पायरोलिसिस ऑयल (Pyrolysis Oil) सुविधा को चालू करने की घोषणा की है। कंपनी ने कर्ज प्रबंधन और कैपिटल विस्तार में भी बड़ी प्रगति की है।
क्या हुआ?
कंपनी की राजकोट (यूनिट II) सुविधा, जो वेस्ट टायरों को पायरोलिसिस ऑयल, कार्बन चार (Carbon Char) और स्टील स्क्रैप (Steel Scrap) में बदलने के लिए पायरोलिसिस तकनीक का उपयोग करती है, अब ऑपरेशनल हो गई है। Horizon Reclaim ने 20 जुलाई, 2026 को इस सुविधा से अपनी पहली कमर्शियल बिक्री दर्ज की। कंपनी ने ₹26.70 करोड़ का कर्ज चुकाया या प्री-पेमेंट किया है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यह कमीशनिंग Horizon Reclaim के वेस्ट-टू-एनर्जी मार्केट सेगमेंट में प्रवेश का प्रतीक है और एक नए ग्रोथ फेज को दर्शाता है। यह विस्तार कंपनी के लिए अपनी कुल क्षमता को 14,100 MTPA से बढ़ाकर 86,800 MTPA करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण है।
बैकस्टोरी
HJorizon Reclaim (India) Ltd, जिसने जून 2026 में BSE SME प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग की थी, एक सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल (Circular Economy Model) के साथ काम करती है। वर्तमान में, कंपनी के पास यूनिट I (14,100 MTPA), राजकोट में नई चालू की गई यूनिट II (36,000 MTPA), और भगवानपुर में यूनिट III (9,600 MTPA) है।
अब क्या बदलेगा?
राजकोट सुविधा के चालू होने के साथ, कंपनी अपने प्रोडक्शन को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेगी। चल रहे विस्तार के पूरा होने पर कुल क्षमता 86,800 MTPA तक पहुंचने की उम्मीद है। कंपनी ने अपने IPO के पैसों से प्लांट और मशीनरी में ₹9.43 करोड़ का निवेश भी किया है और कर्ज को कम किया है।
जोखिम
निवेशक नई राजकोट सुविधा में प्रोडक्शन के रैंप-अप (ramp-up) और लक्षित 86,800 MTPA क्षमता तक पहुंचने की दक्षता पर बारीकी से नजर रखेंगे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में विस्तार के प्रयासों की निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी।
पीयर कंपेरिजन
Hihorizon Reclaim वेस्ट मैनेजमेंट और रीसाइक्लिंग सेक्टर (Waste Management and Recycling Sector) में काम करती है, जिसका मुख्य फोकस वेस्ट टायरों को मूल्यवान संसाधनों में बदलना है। इसका सर्कुलर इकोनॉमी दृष्टिकोण और वेस्ट-टू-एनर्जी सेगमेंट में प्रवेश इसे बढ़ते पर्यावरण समाधान स्पेस में स्थापित करता है।
प्रासंगिक मेट्रिक्स
कैपिटल वर्क-इन-प्रोग्रेस (CWIP) FY25 के ₹3.56 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹36.20 करोड़ हो गया। कुल ऑपरेशनल क्षमता 14,100 MTPA से बढ़कर 86,800 MTPA होने वाली है।
आगे क्या ट्रैक करें?
निवेशकों को राजकोट सुविधा में प्रोडक्शन रैंप-अप, ERP सिस्टम के कार्यान्वयन और अंतरराष्ट्रीय बाजार विस्तार से संबंधित किसी भी विकास पर नजर रखनी चाहिए। कर्ज का स्तर और फाइनेंसिंग लागत भी प्रमुख संकेतक होंगे।
