Hindustan Zinc अपने निवेश, लोन और गारंटी की सीमा को **₹15,000 करोड़** से बढ़ाकर **₹30,000 करोड़** करने जा रही है। इसके लिए कंपनी ने शेयरहोल्डर्स से मंजूरी मांगी है।
बड़ा बदलाव, मैनेजमेंट को मिलेगी ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी
Hindustan Zinc ने शेयरहोल्डर्स से पोस्टल बैलट के जरिए सेक्शन 186 के तहत अपनी इन्वेस्टमेंट लिमिट बढ़ाने की मंजूरी मांगी है। यह सीमा जो वर्तमान में ₹15,000 करोड़ है, उसे दोगुना करके ₹30,000 करोड़ करने का प्रस्ताव है। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 19 अक्टूबर, 2026 को हुई बैठक में इस पर अपनी मुहर लगा दी है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
कंपनी ने साफ किया है कि यह एक 'इनेबलिंग प्रोविजन' (Enabling Provision) है। इसका मुख्य उद्देश्य कंपनी की ट्रेजरी मैनेजमेंट को और मजबूत करना है ताकि भविष्य की विकास योजनाओं (Organic and Inorganic growth) के लिए फंड जुटाने में आसानी हो। इस बढ़ी हुई लिमिट के साथ कंपनी बॉन्ड्स और जीरो-कूपन बॉन्ड्स जैसे इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश की बेहतर प्लानिंग कर पाएगी।
वोटिंग की प्रक्रिया (Timeline)
इस प्रस्ताव पर शेयरहोल्डर्स 4 नवंबर, 2026 की सुबह 9:00 बजे से रिमोट ई-वोटिंग के जरिए अपनी राय दे सकेंगे। वोटिंग की प्रक्रिया 3 दिसंबर, 2026 की शाम 5:00 बजे तक जारी रहेगी। 30 अक्टूबर, 2026 को कट-ऑफ डेट के रूप में तय किया गया है, जिसके आधार पर एलिजिबल शेयरहोल्डर्स वोट डाल पाएंगे।
निवेशकों के लिए क्या है आगे?
भले ही लिमिट बढ़ाने का मतलब तुरंत कैश खर्च करना नहीं है, लेकिन बाजार की नजर इस पर रहेगी कि कंपनी इस फंड का इस्तेमाल कैसे करती है। निवेशकों को आने वाली तिमाही नतीजों और एनुअल रिपोर्ट्स पर बारीकी से नजर रखने की सलाह है, ताकि कंपनी की कैपिटल एलोकेशन रणनीति को समझा जा सके।
