सरकारी कंपनी Hindustan Copper Limited (HCL) के लिए FY26 अब तक का सबसे बेहतरीन साल रहा है। कंपनी का नेट प्रॉफिट **₹920.67 करोड़** के स्तर पर पहुंच गया है और मैनेजमेंट ने **₹1.86** प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान किया है, हालांकि गवर्नेंस से जुड़ी कुछ चुनौतियां निवेशकों के लिए चिंता का सबब हैं।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस के नए रिकॉर्ड
कंपनी ने FY26 के दौरान अपनी ऑपरेशनल कुशलता का शानदार प्रदर्शन किया है। रेवेन्यू पिछले साल के ₹2,070.97 करोड़ से बढ़कर ₹3,077.92 करोड़ पर पहुंच गया है। वहीं, नेट प्रॉफिट में भारी उछाल दर्ज की गई है, जो ₹920.67 करोड़ रहा। कंपनी का अर्निंग्स पर शेयर (EPS) ₹9.52 दर्ज किया गया है, जो निवेशकों के लिए पॉजिटिव संकेत है।
विस्तार की आक्रामक रणनीति
कंपनी अपनी कैपेसिटी को बढ़ाने के लिए 9.69 करोड़ शेयरों के QIP (Qualified Institutional Placement) के जरिए फंड जुटाने की योजना बना रही है। इस निवेश का लक्ष्य उत्पादन क्षमता को वर्तमान के 4 मिलियन टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर FY30 तक 12.2 मिलियन टन तक ले जाना है। कंपनी ने कोलिहान (Kolihan), सुरदा (Surda) और केंद्राडीह (Kendadih) खदानों में कामकाज शुरू कर दिया है, जिससे मेटल-इन-कंसंट्रेट (MIC) प्रोडक्शन में 9% की वृद्धि हुई है।
निवेशक इन रिस्क फैक्टर्स पर रखें नजर
कंपनी के मजबूत नंबर्स के बावजूद कुछ जोखिम बरकरार हैं। फिलहाल, Hindustan Copper में SEBI (LODR) नियमों के अनुसार इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की संख्या कम है, जो कि एक गवर्नेंस गैप है। इसके अलावा, कंपनी कानूनी विवादों में उलझी है, जिसमें टर्मिनल टैक्स, वॉटर सेस विवाद और IVRCL के साथ मध्यस्थता (Arbitration) शामिल है। साथ ही, गुजरात कॉपर प्रोजेक्ट में भूमि अधिग्रहण की चुनौतियां भी कंपनी के सामने हैं।
मार्केट इंडिकेटर: कंपनी का EBITDA मार्जिन पिछले साल के 37.93% से बढ़कर 48.7% हो गया है, जो बेहतर कॉस्ट मैनेजमेंट की ओर इशारा करता है।
