Hindustan Composites की ₹370 करोड़ की बड़ी डील! फ्रिक्शन बिजनेस बेचकर अब इस सेगमेंट पर होगा फोकस

INDUSTRIAL-GOODSSERVICES
Whalesbook Corporate News Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
Hindustan Composites की ₹370 करोड़ की बड़ी डील! फ्रिक्शन बिजनेस बेचकर अब इस सेगमेंट पर होगा फोकस

Hindustan Composites के बोर्ड ने अपने फ्रिक्शन बिजनेस अंडरटेकिंग को Rane (Madras) Ltd को ₹370 करोड़ में बेचने की मंजूरी दे दी है। इस डील से कंपनी अब इन्वेस्टमेंट और कमोडिटी ट्रेडिंग पर ध्यान केंद्रित करेगी।

Detailed Coverage

Hindustan Composites का बड़ा फैसला: ₹370 करोड़ में बेचा फ्रिक्शन बिजनेस

Hindustan Composites Ltd के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने कंपनी के फ्रिक्शन बिजनेस अंडरटेकिंग को Rane (Madras) Limited को ₹370 करोड़ के बदले बेचने की मंजूरी दे दी है। यह एक स्लम्प सेल (Slump Sale) के जरिए होगा। हालांकि, इस सौदे को शेयरधारकों और रेगुलेटरी अथॉरिटीज से मंजूरी मिलना अभी बाकी है।

क्या है यह डील?

कंपनी ने अपने पूरे फ्रिक्शन बिजनेस अंडरटेकिंग को ट्रांसफर करने की मंजूरी दी है। इसमें फ्रिक्शन मैटेरियल्स से जुड़े सभी एसेट्स, देनदारियां, कॉन्ट्रैक्ट्स और लाइसेंस शामिल हैं, जो ऑटोमोटिव, रेलवे और इंडस्ट्रियल एप्लीकेशन्स में इस्तेमाल होते हैं। इस बिजनेस ने Q1 FY27 में ₹85.53 करोड़ का रेवेन्यू जेनरेट किया था।

क्यों महत्वपूर्ण है यह डील?

यह हिंदुस्तान कंपोजिट्स के लिए एक बड़ा स्ट्रैटेजिक शिफ्ट है। ₹370 करोड़ के इस कैश इनफ्लो से कंपनी की फाइनेंशियल पोजीशन मजबूत होने की उम्मीद है। इस सौदे के बाद, कंपनी पूरी तरह से अपने इन्वेस्टमेंट और कमोडिटी ट्रेडिंग सेगमेंट्स पर ही ध्यान केंद्रित करेगी।

कंपनी का पिछला प्रदर्शन

इससे पहले, हिंदुस्तान कंपोजिट्स कई सेगमेंट्स में काम कर रही थी, जिसमें फ्रिक्शन बिजनेस एक अहम रेवेन्यू सोर्स था। कंपनी की Compo Advics (India) Pvt. Ltd में 49% हिस्सेदारी भी है, लेकिन वहां लगातार हो रहे घाटे के चलते अब कंपनी अपने शेयर के नुकसान को पहचानना बंद कर चुकी है।

आगे क्या बदलेगा?

अब कंपनी का पूरा ऑपरेशनल फोकस इन्वेस्टमेंट और ट्रेडिंग एक्टिविटीज पर रहेगा। Q1 FY27 में, कंपनी के जारी बिजनेस (Continuing Business) ने ₹20.05 करोड़ का रेवेन्यू रिपोर्ट किया, जिसमें इन्वेस्टमेंट सेगमेंट से ₹9.81 करोड़ और कमोडिटी ट्रेडिंग सेगमेंट से ₹10.24 करोड़ का योगदान रहा।

जोखिम और चुनौतियां

इस ट्रांजेक्शन को पूरा होने में अभी शेयरधारकों और रेगुलेटरी अप्रूवल्स का इंतजार है। बिजनेस ट्रांसफर एग्रीमेंट की शर्तें भी पूरी होनी बाकी हैं। इसके अलावा, कंपनी को अपनी ज्वाइंट वेंचर Compo Advics (India) Pvt. Ltd के साथ संचित घाटे (Accumulated Losses) की चुनौती का भी सामना करना पड़ रहा है।

पीयर कंपेरिजन

ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स सेक्टर की कंपनियां अक्सर वैल्यू अनलॉक करने और ऑपरेशंस को सुव्यवस्थित करने के लिए नॉन-कोर या कम प्रदर्शन करने वाले बिजनेसेज को बेचकर स्ट्रैटेजिक रीअलाइनमेंट करती हैं। खरीदार, Rane (Madras) Limited, भी इसी तरह के ऑटोमोटिव कंपोनेंट सेगमेंट में एक स्थापित खिलाड़ी है।

Q1 FY27 के नंबर्स

  • कुल प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT): ₹8.68 करोड़
  • बेसिक और डाइल्यूटेड ईपीएस (EPS): ₹5.88
  • जारी ऑपरेशंस का रेवेन्यू: ₹20.05 करोड़
  • बंद किए गए ऑपरेशंस का रेवेन्यू (फ्रिक्शन बिजनेस): ₹85.53 करोड़

आगे क्या देखें?

निवेशकों को इस डिवेस्टमेंट के लिए शेयरधारक और रेगुलेटरी अप्रूवल्स की प्रगति पर नजर रखनी चाहिए। ₹370 करोड़ की इस रकम को कंपनी कैसे इस्तेमाल करती है, यह भविष्य में वैल्यू क्रिएशन का अहम पैमाना होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.